दो दिवसीय वैज्ञानिक दक्षता निर्माण प्रशिक्षण का आगाज
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | सीएसए के प्रसार निदेशालय के लाल बहादुर शास्त्री सभागार कक्ष में शुक्रवार से कृषि वैज्ञानिकों का दो दिवसीय दक्षता प्रशिक्षण एवं मृदा में जैविक पदार्थ बढ़ाओ संकल्प अभियान कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।विश्वविद्यालय के कुलपति श्री के.विजयेंद्र पांडियन एवं अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के निदेशक प्रसार डॉक्टर एस के सिंह ने वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए कहा कि देश का पहला कृषि विज्ञान केंद्र 1974 में पांडिचेरी में स्थापित हुआ। उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि वे नवीन कृषि तकनीकियों को किसानों की आवश्यकता अनुरूप हस्तांतरित करें। डॉ सिंह ने कहा कि आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग आत्मनिर्भरता के लिए आवश्यक है। नए उपकरण, बेहतर बीज और उन्नत सिंचाई तकनीकों के माध्यम से कृषि उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है। ड्रिप इरिगेशन, हाइड्रोपोनिक्स और जैविक खेती जैसी तकनीकें गाँवों की कृषि को अधिक प्रभावी और उत्पादनशील बना सकती हैं।गाँवों में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव भी बढ़ता जा रहा है, जिससे कृषि पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इस चुनौती से निपटने के लिए जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपनाना जरूरी है। जलवायु के अनुसार खेती के तरीके बदलने से उत्पादन क्षमता को बनाए रखा जा सकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलपति श्री के.विजयेंद्र पांडियन ने वैज्ञानिकों से कहा कि वे सस्य जलवायु क्षेत्र के अनुसार कृषि तकनीकियों को किसानों तक हस्तांतरित करें। उन्होंने कृषि की लागत कम करने के लिए जैविक खेती, फसल चक्र और समेकित कीट प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया। साथ ही स्थानीय मंडियों का उपयोग,तथा फ़सल कटाई के बाद मूल्य संवर्धन (प्रोसेसिंग) से आय बढ़ाने पर जोर दिया। साथ ही मृदा में जीवांश कार्बन बढ़ाकर कृषि लागत को कम करने पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि के तौर पर उपस्थित बांदा कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉक्टर एनके वाजपेई ने आवश्यकता अनुसार किसानों के प्रशिक्षण के तौर तरीकों पर विस्तार से प्रस्तुतीकरण दिया। निदेशक प्रसार डॉ. आरके यादव ने सभी अतिथियों को अंग वस्त्र व पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया।उन्होंने कहा कि देश में 140 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती की जा रही है जिसमें जीवांश पदार्थ बनाए रखना बहुत जरूरी है उन्होंने कहा कि एक ग्राम मिट्टी में लगभग 6000 से भी अधिक जीवाणु होते हैं जो फसल उत्पादन और पर्यावरण के लिए बहुत ही अनुकूल होते हैं। उद्घाटन सत्र पर वर्ष 2026 का कैलेंडर भी लॉन्च किया गया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. अरविंद कुमार यादव ने किया।इस अवसर पर डॉ वी के त्रिपाठी, डॉ विजय कुमार यादव, डॉ महक सिंह, डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव, डॉ विनोद प्रकाश, डॉ भूपेंद्र सिंह, डॉक्टर वी के कनौजिया सहित सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों के वैज्ञानिक एवं प्रभारी तथा अध्यक्ष उपस्थित रहे।
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