15 वर्षो से नगर निगम में नही टिक सकी कोई भी निजी कम्पनी
- ए टू जेड कम्पनी ने नगर निगम का पहुंचाया था करोडो नुकसान
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। नगर निगम मूें टेंडर प्रक्रिया को लेकर कर्मचारियों द्वारा कड़ा विरोध किया जा रहा। यहां तक की कर्मचारियों ने टेंडर प्रक्रिया होने पर बडे आन्दोलन पर जाने की बात कही है। वही नगर निगम में बीते 15 वर्षो से कोई भी टेंडर प्रक्रिया से आयी कम्पनी नगर निगम में टिक कर काम नही कर सकी जिसके चलते नगर निगम को भारी नुकसान उठाना पडा है।
विभागीय सूत्रो के अनुसार आपको बता दे कि नगर निगम में वर्ष 2010 में ए टू जेड कम्पनी जिसे लगभग 600 करोड वाहन उपक मुहैया कराया गया। एक से दो वर्ष तक तो काम ठीक ठाक चला,लेकिन ए टू जेड कम्पनी वर्ष 2012 में भाग खडी हुई। कम्पनी से नगर निगम कुछ ही वाहन वापस ला सका जबकि आज भी कूडे के ढेर में लगभग 300 से ज्यादा वाहन दब कर कंडम हो गए जिससे नगर निगम को भारी नुकसान उठाना पडा। यही नही इस कम्पनी के खिलाफ हाई कोर्ट में मुकदमा भी चल रहा है जिससे अब न तो नगर निगम वाहन ले सकता है और न ही उसका संचालन ही कर सकता है। कई ऐसे वाहन नगर निगम के डम्प स्टेशनो के बाहर खडे देखे जा सकते है। इसके बाद वर्ष 2012 में एलएफएक्स आयी लेकिन वह भी दो वर्ष में अपना काम समेट कर चलती बनी। इसके बाद वर्ष 2019 में तत्कालीन नगर आयुक्त अक्ष्य त्रिपाठी के द्वारा नगर निगम ने प्लांट का संचालन अपने हाथो में ले लिया। वर्ष 2021-22 में ईएसएसएल कम्पनी ने नगर निगम से टेंडर लिया और स्ट्रीट लाइट लगाने का काम शुरू किया। सोडियम लाइटो के स्थान पर एलईडी लाइटो का प्रयोग किया गया,लेकिन वह भी ज्यादा समय तक नही चल सकी। अब ऐसे में लगातार फेल होती रही कम्पनियों ने नगर निगम को खासा नुकसान पहुंचाया। वहीं नगर निगम की कर्मचारी यूनियनों ने भी टेंडर प्रक्रिया किसी अन्य कम्पनी को दिये जाने का पुरजोर विरोध शुरू कर दिया। कर्मचारी यूनियनों के पदाधिकारियों ने नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय एवं महापौर को ज्ञापन देकर टेंडर प्रक्रिया के अर्न्तगत आने वाली कम्पी का विरोध करते हुए उसे निरस्त करने की मांग की है।