सात दिवसीय विशेष शिविर समापन पर समूह नृत्य के जरिए विविधता में एकता का दिया संदेश |
सुनील कुमार धुरिया संवाददाता
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस राठ,हमीरपुर l ब्रह्मानंद स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राठ की राष्ट्रीय सेवा योजना की दोनों इकाइयों द्वारा ग्राम गल्हिया में आयोजित सात दिवसीय विशेष शिविर का समापन हुआ। प्रातः आयोजित तकनीकी सत्र में भारतीय संविधान की मूल भावना, मौलिक अधिकार, कर्तव्य एवं सामाजिक न्याय की अवधारणा पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डा. हल्के प्रसाद ने कहा कि संविधान सामाजिक संतुलन एवं न्याय की आधारशिला है।वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, नेतृत्व क्षमता एवं राष्ट्रप्रेम की भावना विकसित करना है। कार्यक्रम अधिकारी डॉ. दुर्गेश कुमार ने संविधान की प्रस्तावना का उल्लेख करते हुए न्याय, स्वतंत्रता, समानता एवं बंधुत्व के आदर्शों को व्यवहार में अपनाने पर बल दिया। डा. सरजू नारायण ने कहा कि समानता का अधिकार ही लोकतंत्र की सच्ची पहचान है। डा. कमलेश राम ने ग्राम स्तर पर समरसता एवं सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। डा. श्री गोविंद राजपूत ने कहा कि सामाजिक न्याय के बिना समावेशी विकास संभव नहीं है। डा. आर.बी. शर्मा ने युवाओं से कर्तव्यों के पालन पर विशेष बल दिया। डा. शैलेन्द्र कुमार ने कहा कि जागरूक नागरिक ही संविधान की वास्तविक शक्ति हैं। तकनीकी सत्र के दौरान स्वयंसेवकों ने भी उत्साहपूर्वक अपने विचार व्यक्त किए। स्वयंसेविका कुमारी पूजा वर्मा ने कहा, “संविधान हमें समान अधिकार देता है, इसलिए हमें भी समान व्यवहार का संकल्प लेना चाहिए।” स्वयंसेवक रोहित कुमार ने कहा, “लोकतंत्र की मजबूती सामाजिक न्याय से ही संभव है।” कुमारी नेहा सिंह ने कहा, “हम युवाओं को भेदभाव मुक्त समाज निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।” स्वयंसेवक अंकित तिवारी ने कहा, “संविधान का पालन ही सच्ची देशभक्ति है।” कुमारी राधा यादव ने कहा, “समानता और समरसता से ही राष्ट्र प्रगति करेगा।” स्वयंसेवक विकास निषाद ने कहा, “हम सभी को अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए।” स्वयंसेविका साक्षी मिश्रा ने कहा, “सामाजिक न्याय से ही प्रत्येक वर्ग को सम्मान मिलेगा।” स्वयंसेवक अंशुल वर्मा ने कहा, “युवा शक्ति यदि जागरूक हो जाए तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन अवश्य होगा।” इसके उपरांत ग्राम में जागरूकता रैली निकाली गई, जिसमें “संविधान का मान–राष्ट्र का सम्मान। संध्या सत्र में शिविर के समापन अवसर पर अत्यंत भव्य एवं प्रेरणादायी सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ सामूहिक देशभक्ति गीत से हुआ, जिसने उपस्थित जनसमूह को राष्ट्रप्रेम की भावना से ओत-प्रोत कर दिया। इसके पश्चात स्वयंसेवकों द्वारा संविधान की प्रस्तावना एवं सामाजिक समानता पर आधारित एक सशक्त नाट्य प्रस्तुति दी गई, जिसमें सामाजिक भेदभाव के दुष्परिणाम और समानता के महत्व को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया गया। समूह नृत्य के माध्यम से “विविधता में एकता” का संदेश दिया गया, जबकि काव्य-पाठ और लघु संवादों ने सामाजिक न्याय की आवश्यकता को भावपूर्ण अभिव्यक्ति दी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध किया कि युवा शक्ति केवल जागरूक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील एवं सृजनशील भी है। कार्यक्रम का समापन एन.एस.एस. के संकल्प गीत एवं राष्ट्रगान के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर डा. राजेंद्र कुमार, श्री दृगपाल सिंह, हरनाथ सिंह, उर्मिला राजपूत, सुलोचना, वंदना, धर्मेंद्र सहित कई गणमान्य उपस्थित थे। सांस्कृतिक कार्यक्रम में मोहित, मुकेश, सौम्या सोनी, आकांक्षा, उपासना, शामिद, करिश्मा, संगीता, मुस्कान, प्रतीक्षा, पुष्पेंद्र, रानी, बाबनीता, दिशा, जूली, मेघा, लेखराज, प्रांजलि, सपना, पायल, मुस्कान, डोली, दीपांशी, जूली, रोशनी, ममता, अंजली, वंदना आदि स्वयंसेवकों ने चढ़ बढ़कर भाग लिया।