चैत्र नवरात्रि की धूम देवी मंदिरों में उमड़ी भीड़
- कलश स्थापना के साथ मां शैलपुत्री की पूजा
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व गुरुवार, 19 मार्च 2026 से पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ शुरू हो गया। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा और कलश स्थापना के साथ ही शहर के प्रमुख देवी मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। 'जय माता दी' के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और सुबह से ही मंदिरों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं।
शहर के प्रसिद्ध तपेश्वरी देवी मंदिर (बिरहाना रोड) में तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मान्यता है कि यह मंदिर रामायण काल से जुड़ा हुआ है और यहां मां सीता ने लव-कुश का मुंडन संस्कार कराया था। मंदिर परिसर में एक साथ तीन देवी स्वरूप विराजमान हैं, जिनके दर्शन के लिए दूर-दराज से लोग पहुंचते हैं। इसके साथ ही बारादेवी मंदिर, जंगली देवी मंदिर और काली मठिया मंदिर में भी सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। सभी मंदिरों में विशेष सजावट की गई है और माता के दरबार को फूलों व रोशनी से भव्य रूप दिया गया है। वहीं, तपेश्वरी मंदिर के पास स्थित वैभव लक्ष्मी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की अच्छी-खासी भीड़ रही। यहां हर वर्ष ढाई किलो की अखंड जोत जलाने की परंपरा है और शुक्रवार को भक्तों के बीच 'खजाना' वितरण का विशेष आयोजन होता है, जिसे लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह रहता है। नवरात्रि के पहले दिन शहरभर के देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना, दुर्गा सप्तशती पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन शुरू हो गया है। भक्त उपवास रखकर माता रानी की आराधना में जुटे हैं और पूरे नौ दिन तक विभिन्न स्वरूपों की पूजा करेंगे।
भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सभी प्रमुख मंदिरों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। मंदिर परिसरों और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती की गई है, साथ ही सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। भीड़ प्रबंधन के लिए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। नवरात्रि के शुभारंभ के साथ ही शहर में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया है। आने वाले दिनों में भक्तों की संख्या और बढ़ने की संभावना है।