मोडिफाई साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न लगा कर चलने वालो कि खैर नहीं
- 3 माह का कारावास के साथ डीएल तथा पंजीयन भी होगा निरस्त
- प्रत्येक परिवर्तन पर लगेगा 5 हजार का जुर्माना।
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। अब मोडिफाई साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न अथवा हूटर लगा कर चलने वालो कि खैर नहीं है। परिवहन विभाग अब ऐसे संचालित वाहनों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के साथ ही डीएल निलंबन तथा पंजीकरण भी सस्पेंड करने की कार्यवाही करने जा रहा है। मा. उच्च न्यायालय द्वारा जारी निर्देश के तहत उ०प्र० परिवहन आयुक्त ने सभी जनपदों के सम्भागीय परिवहन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वह बिक्री एवं स्थापना करने वाले मोटर गैराज व वर्कशॉप आदि युक्त वाहनों से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम के तहत कार्यवाही करे । निर्देश के क्रम में शनिवार को आरटीओ कार्यालय में समस्त डीलरों, मोटर गैराज एवं वर्कशॉप संचालकों के साथ बैठक कर उन्हें इस बावत जानकारी दी गई।
एआरटीओ प्रशासन आलोक कुमार सिंह ने बताया कि डीलरो के साथ बैठक कर उन्हें बताया गया कि मा. उच्च न्यायालय खंडपीठ लखनऊ के द्वारा निर्देशित किया गया कि किसी भी प्रकार से दोपहिया वाहनों में साइलेंसर को मॉडिफाई कर पटाखा छोड़ने वाला ना बनाया जाए साथ ही साथ हुटर एवं प्रेशर हॉर्न न लगाया जाए यदि सर्विस के लिए वाहन आते हैं तो उनमें निकलवाने के उपरांत ही सर्विस की जाए। मोडिफाइड साइलेंसर, प्रेशर हॉर्न अथवा हूटर की बिक्री एवं स्थापना करने वाले मोटर गैराज वर्कशॉपो आदि उक्त वाहनों से उत्पन्न ध्वनि प्रदूषण के विरुद्ध मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 182ए (3) के अंतर्गत विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी तथा जुर्माना भी किया जा जायेगा। उन्होंने बताया कि इस जुर्माने के शमन की शक्ति उप परिवहन आयुक्त एवं उनसे ऊपर के अधिकारियों के पास होगी। जिन वाहन स्वामियों द्वारा अपने वाहनों में अनधिकृत अल्ट्रेशन करते हुए ऐसा परिवर्तन किया है तो उसे तत्काल हटवा दे नहीं तो उनके विरुद्ध मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 182ए (4) के अंतर्गत विधिक कार्यवाही की जाएगी तथा धारा 182ए (4) के तहत सम्बन्धित वाहन स्वामी को छः माह तक का कारावास हो सकता है। इसके साथ ही ऐसे प्रत्येक परिवर्तन के लिए पाँच हजार रुपये तक के जुर्माने से अथवा दोनों से दडिंत किया जाएगा। आगे उन्होंने बताया कि जो भी व्यक्ति किसी सार्वजानिक स्थान में ऐसा वाहन चलाएगा, अथवा चलाने देगा जिससे सड़क सुरक्षा, शोर नियत्रंण एवं बायु प्रदूषण कर मानकों का उल्लंघन करता हैं तो उनके विरुद्ध मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 190 (2) के अर्न्तगत विधिक कार्यवाही की जायेगी। साथ ही धारा 190(2) के तहत सम्बन्धित व्यक्ति प्रथम अपराध के लिए तीन माह तक के कारावास अथवा दस हजार रूपये तक के जुमनि या दोनों से दंडनीय होगा और तीन माह की अवधि के लिए अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) सस्पेंड कर दिया जायेगा। परिवहन विभाग ने समस्त वाहन स्वामियों से अपील की है कि वह मोडिफाइड साइलेन्सर, प्रेशर हॉर्न, हुटर, इत्यादि को अपनी वाहनों पर न लगाये अन्यथा उनके विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जायेगी।
- मोडिफाई वाहन सड़क पर दौड़ तो डीएल और पंजीयन हो सकता है निरस्त
सड़को पर अब जो मोडिफाई वाहन चला रहा है या चलवा रहा है, वह व्यक्ति उस जुर्माने का दायी होने के साथ-साथ उसका ड्राइविंग लाइसेंस तीन माह के लिये अयोग्य कर दिया जायेगा। इसके साथ ही जिन वाहनों में मोडिफाइड साइलेंसर लगे मिले मोटरयान अधिनियम, 1988 की धारा 53 (1) के अंतर्गत पंजीयन प्रमाण-पत्र के निलम्बन की कार्यवाही की जायेगी।