मां बोझ नहीं, बराबरी चाहिए
-मां को मैनेजर नहीं, इंसान समझो
-मां के लिए सबसे बड़ा गिफ्ट: लो मैंने अभी से पान मसाला खाना छोड़ दिया -ज्योति बाबा
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। मां के बिना शर्त प्यार,त्याग और बलिदान को सम्मान देने के लिए मदर्स डे मनाया जाता है लेकिन इसी बहाने पूरी दुनिया मां के योगदान को याद करती है मां के मातृत्व,ममता और ताकत को सेलिब्रेट करने का दिन मदर्स डे है सिर्फ अपनी मन नहीं बल्कि दादी नानी और मात्र स्वरूप सभी महिलाओं को सम्मान देना हमारा कर्तव्य है उपरोक्त बात सोसाइटी योग ज्योति इंडिया, हिंदू जागरण मंच व अलंकृत फाउंडेशन के तत्वाधान में मदर्स डे पर नशा मुक्ति युवा भारत थीम पर आयोजित संगोष्ठी शीर्षक टिफिन से लेकर कैरियर तक थैंक यू मां,अब बारी हमारी है पर अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्त अभियान के प्रमुख,एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड धारी योग गुरू ज्योति बाबा ने कहीं,ज्योति बाबा ने आगे कहा कि इस बार की मदर डे की थीम है द ग्रेट अनबर्डेनिंग यानी मां के कंधों से जिम्मेदारियों का बोझ उतारना। एना जार्विस ने 1908 में अपनी मां की याद में यह दिन शुरू किया था, आज मां सिर्फ खाना बनाने वाली नहीं रही वह ऑफिस भी संभालती है बच्चों को पढाती भी है और घर भी चलाती है डेटा कहता है भारत में 60% कामकाजी महिलाएं घर और ऑफिस यानी डबल शिफ्ट काम करती हैं इस मदर्स डे पर केवल फूल और गिफ्ट से काम नहीं चलेगा बल्कि उससे आगे बढ़े और मां को किचन से एक दिन की छुट्टी दें, उनकी थकान समझे थैंक यू के साथ मैं हेल्प करूंगा बोले। क्योंकि मां को मैनेजर नहीं, इंसान चाहिए।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सोसाइटी योग ज्योति इंडिया डॉक्टर धर्मेंद्र यादव ने कहा कि मां शब्द सुनते ही आंख बंद करके जो चेहरा दिखता है वो अब बदल रहा है कानपुर की सुनीता 8 घंटे बैंक में काम करती है फिर घर जाकर बेटों का होमवर्क कराती है 72 साल की दादी शांति अपने न्यूरो डायवर्जेंट पोते की स्पेशल केयर करती है। यह 2026 की मां है स्ट्रांग थकी हुई,पर हार ना मानने वाली। समाजसेवी शिक्षाविद साकेत सिंह ने कहा कि इस मदर्स डे पर बेटी व बेटा अपनी मां को नशा छोड़ने का तोहफा देकर उनको पूरे जीवन की खुशियां दे सकती हैं क्योंकि हर मां का सपना होता है कि उसके बच्चे स्वस्थ एवं प्रगतिशील बने रहें। प्रदेश महिला संयोजका डॉक्टर सुलोचना दीक्षित ने जोर देकर कहा कि मदर्स डे सनातन संस्कृत में हर दिन मनाया जाता है इसलिए हमें अपनी सनातन संस्कृति की जड़ों को निरंतर सीचंना होगा संगोष्ठी का संचालन उपेंद्र मिश्रा व संयोजन शोभा मिश्रा तथा धन्यवाद पीयूष रंजन सनातनी ने दिया। अंत में सभी को ज्योति बाबा ने मां को खुशियों भरा गिफ्ट देने के लिए नशे को जीवन से निकालने का संकल्प भी कराया।