डिजिटल अरेस्ट के नाम पर करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का खुलासा, दो आरोपी गिरफ्तार
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। थाना पनकी पुलिस और पश्चिम जोन साइबर सेल की संयुक्त कार्रवाई में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर देशभर में करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया गया है। पुलिस ने गिरोह से जुड़े दो आरोपियों, जगदीशचंद्र गुप्ता और रोहित भसीन को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी साइबर पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के आधार पर चिन्हित संदिग्ध बैंक खातों का इस्तेमाल कर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर ठगी करते थे। जांच के दौरान पता चला कि जगदीशचंद्र गुप्ता के नाम पर “बालाजी फाउंडेशन” के नाम से आईसीआईसीआई बैंक में संचालित खाते में करीब 10 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। इसमें एक ही ट्रांजैक्शन में 3.25 करोड़ रुपये प्राप्त होने की जानकारी मिली है।पूछताछ में खुलासा हुआ कि रोहित भसीन उसका सहयोगी है और नोएडा स्थित आईसीआईसीआई बैंक के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी व म्यूल खाते खुलवाए जाते थे। मामले में बैंक कर्मचारी मुकुल वर्मा और धीरज, जो शाखा प्रबंधक और डिप्टी शाखा प्रबंधक थे, को गुजरात पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। पुलिस के अनुसार, आरोपी 16 मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल कर अलग-अलग भाषाओं में लोगों को कॉल करते थे और खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाते थे। इसके बाद पीड़ितों से करोड़ों रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर कराए जाते थे। जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क देशभर में फैला हुआ था। आंध्र प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और तमिलनाडु समेत आठ राज्यों से संबंधित शिकायतें मिली हैं। आरोपी बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से खातों की ट्रांजैक्शन लिमिट बढ़वाकर बड़ी रकम को तत्काल रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट और नेफ्ट के जरिए अन्य खातों में ट्रांसफर कर देते थे। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जगदीशचंद्र गुप्ता पहले बिजली चोरी के मामले में आरोपी रह चुका है, जबकि रोहित भसीन विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर अपराधों में वांछित था। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।
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