सीएसजेएमयू और जर्मनी की रीयूट्लिंगन यूनिवर्सिटी के बीच ऐतिहासिक एमओयू
- सीएसजेएमयू के इतिहास में पहली बार शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय पाठ्यक्रम एक्सचेंज
- 3+1+1 एजुकेशन मॉडल से मेधा को मिलेंगे 'ग्लोबल पंख'
-पोर्श और आईबीएम जैसी दिग्गज कंपनियों में शत-प्रतिशत प्लेसमेंट और जर्मनी की परमानेंट रेजिडेंसी (PR) की राह हुई आसान
- पढ़ाई के दौरान हर महीने ₹2.5 लाख तक की कमाई
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विवि ने अंतरराष्ट्रीय शिक्षा में बड़ी छलांग लगाते हुए देश के शैक्षणिक जगत का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट किया। विवि ने जर्मनी की प्रतिष्ठित द रीयूट्लिंगन यूनिवर्सिटी नॉलेज फाउंडेशन (केएफआरयू) के साथ ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर (MoU) कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और रीयूट्लिंगन यूनिवर्सिटी नॉलेज फाउंडेशन के (सीईओ) मुख्य कार्यकारी अधिकारी डैनियल गीगिस ने हस्ताक्षर किए।
दोनों संस्थान मिलकर 5 वर्षीय इंटरनेशनल इंटीग्रेटेड बैचलर एंड मास्टर्स प्रोग्राम शुरू करने जा रहे हैं, जो भारतीय छात्रों के लिए वैश्विक स्तर पर करियर बनाने के द्वार खोलेगा। विवि के अब तक के इतिहास में यह पहला अवसर है जब विश्वविद्यालय ने वैश्विक स्तर पर इस तरह के क्रांतिकारी "पाठ्यक्रम एक्सचेंज और हाइब्रिड क्रेडिट ट्रांसफर कांसेप्ट" की शुरुआत की है । यह न केवल विश्वविद्यालय बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश की तकनीकी शिक्षा के लिए एक युगांतकारी कदम है, जहां स्थानीय मेधा को सीधे यूरोप के सबसे बड़े औद्योगिक हब से जोड़कर शिक्षा की सीमाओं को हमेशा के लिए बदल दिया गया है।
पाठ्यक्रम को 3+1+1 मॉडल के आधार पर तैयार किया गया है , जिसके प्रथम चरण के तहत छात्र पहले 3 साल सीएसजेएमयू (UIET) में रहकर अपनी बी.टेक (B.Tech) की पढ़ाई करेंगे । इस दौरान पाठ्यक्रम का 20% हिस्सा जर्मन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों द्वारा डिजिटली और हाइब्रिड मोड में पढ़ाया जाएगा, ताकि छात्र जर्मन इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुकूल तैयार हो सकें।छात्रों को प्रवास के दौरान ही कैंपस में अनिवार्य रूप से जर्मन भाषा (A1 से B1 लेवल) का प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह प्रोग्राम मुख्य रूप से दो प्रमुख क्षेत्रों में संचालित होगा, जिसमें पहला 'प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग' है, जिसके तहत छात्रों को कंप्यूटर साइंस में बी.टेक और जर्मनी से एम.एस.सी. की डिग्री मिलेगी। वही
दूसरा क्षेत्र 'डिजिटल बिजनेस मैनेजमेंट' है, जिसके तहत ईसीई, मैकेनिकल और ईईई (ECE, Mech, EEE) के छात्रों को बी.टेक और जर्मनी से मास्टर्स की डिग्री दी जाएगी। कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि यह समझौता हमारे छात्रों को वैश्विक मंच पर एक क्रांतिकारी कदम है, जिससे शहर और प्रदेश के छात्र बेहद कम खर्च में विश्वस्तरीय जर्मन शिक्षा हासिल कर सकेंगे और पोर्श जैसी दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में अपना करियर शुरू कर सकेंगे। वहीं यूआईईटी (UIET) के निदेशक डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि UIET हमेशा से ही तकनीकी शिक्षा में नवाचार का केंद्र रहा है। इस इंटीग्रेटेड प्रोग्राम के माध्यम से हमारे इंजीनियरिंग छात्रों को पहले दिन से ही वैश्विक स्तर का एक्सपोज़र मिलेगा, जहां संस्थान में मिलने वाला 3 साल का कड़ा प्रशिक्षण और जर्मनी की एडवांस्ड लैब में बिताए जाने वाले 2 साल इन्हें ग्लोबल लीडर बनाएंगे। एमओयू सेरेमनी के दौरान विवि के प्रशासनिक और तकनीकी संकाय की उपस्थिति रही, जिसमें विभिन्न इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों के विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ शिक्षक, शोधकर्ता और प्रशासनिक अधिकारी मुख्य रूप से उपस्थित रहे और सभी ने इस अंतरराष्ट्रीय समन्वय को विवि के इतिहास में एक मील का पत्थर बताया।
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अर्न व्हाईल यू लर्न': पढ़ाई के साथ हर महीने लाखों की कमाई का चांस
इस प्रोग्राम का आकर्षक खासियत छात्रों को मिलने वाला 'अर्न व्हाईल यू लर्न' का मौका है । जर्मनी में चौथे वर्ष की पढ़ाई और संयुक्त थीसिस के दौरान छात्र हर महीने €1,200 से €1,500 (लगभग 1.10 लाख से 1.35 लाख रुपये) तक कमा सकेंगे । इसके बाद मास्टर्स के दौरान वर्क+स्टडी मोड में काम करते हुए छात्र €2,000 से €2,500 (लगभग 1.8 लाख से 2.25 लाख रुपये) प्रति माह तक की शानदार अर्निंग कर सकते हैं। रीयूट्लिंगन यूनिवर्सिटी के 50 से अधिक मजबूत वैश्विक औद्योगिक और अनुसंधान पार्टनर्स हैं, जिसके चलते इस प्रोग्राम के छात्रों को MHP (A Porsche Company), IBM, और हैवलेट पैकार्ड (HP) जैसी दिग्गज कंपनियों में सीधे इंटर्नशिप और रोजगार के बेहतरीन अवसर मिलेंगे)।
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यूरोपीय मार्केट में सीधी एंट्री: परमानेंट रेजिडेंसी (PR) की राह हुई आसान
जर्मनी से मास्टर्स पूरा करने के बाद छात्रों को मिलने वाले नियमों के तहत 18 महीने का पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट दिया जाएगा। इसके साथ ही केवल 18 महीनों में 'ईयू ब्लू कार्ड' और मात्र 21 महीनों में जर्मनी की परमानेंट रेजिडेंसी (PR) पाने का पारदर्शी रास्ता साफ हो जाएगा । जर्मनी में आईटी और कंप्यूटर साइंस के स्नातकों का शुरुआती सालाना पैकेज ही €55,000 से €85,000+ (लगभग 50 लाख से 76 लाख रुपये) के बीच होता है । इस वैश्विक प्रोग्राम के लिए प्रति कोर्स न्यूनतम 30 और अधिकतम 60 सीटें निर्धारित की गई हैं। यह पूरा प्रोग्राम शैक्षणिक सत्र 2026 से प्रभावी रूप से शुरू होने जा रहा है, जिसके लिए प्रवेश परीक्षा और चयन प्रक्रिया विवि द्वारा रीयूट्लिंगन यूनिवर्सिटी के सहयोग से आयोजित की जाएगी।