चौपाल के जरिए हक हुक़ूक़ के लिए जुटा मांझी समाज |
- न्याय न मिला तो होगा बड़ा महाआंदोलन - राजेश मांझी |
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस भोपाल मध्यप्रदेश | मांझी जनजाति संघर्ष समिति के बैनर तले शाहजहानी पार्क में एक विशाल मांझी चौपाल आयोजित की गई जिसमें समाज के 52 जिलों से आये देवतुल्य बहन भाइयों ने शिरकत कर अपनी अपनी भागीदारी दर्ज करायी | चौपाल के पश्चात एक सम्बोधित ज्ञापन गृहमंत्री को सौंपा गया | सौंपे गए ज्ञापन के जरिए बताया गया कि पूर्व विंध्य प्रदेश के राज प्रमुख द्वारा अनुच्छेद 342 के तहत केंद्र सरकार को 7 जनवरी 1950 को भेजें गये अनुशंसा पत्र में मांझी के साथ समाहित ढीमर ,भोई,केवट , मल्लाह आदि मांझी नहीं है तो मध्यप्रदेश में मांझी कौन है? संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ढीमर,भोई, केवट मल्लाह आदि को मांझी जनजाति का संवैधानिक अधिकार मिल सकें | समाज के जिन व्यक्तियों के पिता व अन्य परिजनों के पूर्व के मांझी जनजाति के प्रमाण पत्र बनें हैं उनके परिवार जनों को मांझी क्यों नहीं माना जा रहा है? मध्य प्रदेश में में मांझी कौन हैं यह तय नहीं हो जाता तब तक मांझी प्रमाण पत्र धारी व्यक्तियों के खिलाफ किसी भी तरह की जांच व कार्यवाही पर रोक लगाई जाएं | चौपाल को सम्बोधित करते हुए निषाद सेना जिला नर्मदा परम राजेश मांझी ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहां कि अगर इससे भी बात न बनी तो आगामी कार्यक्रम जो कि भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है उस कार्यक्रम में अपने समाज को न्याय दिलाने के लिए एक महारैली आंदोलन होगा जिसमें सेना के नौजवान सम्मानित पदाधिकारी अपने सर के बाल मुण्डवाकर मुख्यमंत्री के दरवाजे पर दस्तक देकर अपनी हक की बात रखेंगे | चौपाल में प्रदीप मांझी, राजेश मांझी, नन्द किशोर संतौर संतोष मांझी, ट्विंकल संतौर बद्री प्रसाद केवट, राजेश रैकवार हरियाणा सोनिया कैलाश मेवाड़ी श्याम कहार, संजय रैकवार आदि तमाम समाज के लोग मौजूद रहे |