गिर, साहीवाल समेत उन्नत स्वदेशी नस्ल की गायों के पालन को मिलेगा बढ़ावा
*मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना में ई-लॉटरी से 28 पशुपालकों का चयन
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर।गिर, साहीवाल, हरियाणा और थारपारकर जैसी उन्नत स्वदेशी नस्ल की गायों के पालन को जनपद में और बढ़ावा मिलेगा। नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत संचालित मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष 28 पशुपालकों का ई-लॉटरी के माध्यम से चयन किया गया है। चयनित लाभार्थी दो-दो उन्नत स्वदेशी दुधारू गायों की इकाई स्थापित कर पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन से अपनी आय बढ़ा सकेंगे।
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी श्री जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता एवं मुख्य विकास अधिकारी श्री अभिनव जे. जैन की उपस्थिति में ई-लॉटरी की प्रक्रिया संपन्न कराई गई। पूरी प्रक्रिया निर्धारित प्रावधानों के अनुसार कराते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जनपद को प्राप्त 28 लाभार्थियों के लक्ष्य के सापेक्ष चयन किया गया जिसमें 14 पुरुष एवं 14 महिला लाभार्थी हैं।
मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना में देश की प्रमुख स्वदेशी दुधारू नस्लों गिर, साहीवाल, हरियाणा एवं थारपारकर को शामिल किया गया है। योजना के माध्यम से इन उन्नत स्वदेशी नस्लों के पालन को प्रोत्साहित करने के साथ उनके संरक्षण एवं संवर्धन तथा दुग्ध उत्पादन में वृद्धि पर जोर दिया जा रहा है। पशुपालकों को बेहतर दुधारू स्वदेशी नस्लों से जोड़कर पशुपालन को आय के स्थायी साधन के रूप में विकसित करना भी योजना का उद्देश्य है।
योजना के अंतर्गत चयनित पशुपालक प्रदेश के बाहर से निर्धारित उन्नत स्वदेशी नस्ल की दो दुधारू गायों का क्रय कर इकाई स्थापित कर सकेंगे। गायों के क्रय के लिए मुख्य विकास अधिकारी के स्तर से चयनित लाभार्थियों को अनुमति पत्र जारी किए जाने का प्रावधान है। क्रय की जाने वाली गाय प्रथम अथवा द्वितीय ब्यांत की होने के साथ स्वस्थ एवं रोगमुक्त होनी चाहिए।
*80 हजार रूपये तक मिलेगा अनुदान
दो उन्नत स्वदेशी दुधारू गायों की एक इकाई की अधिकतम लागत दो लाख रुपये निर्धारित की गई है। इसमें गायों की खरीद के साथ उनके परिवहन, ट्रांजिट बीमा, तीन वर्ष के पशु बीमा, चारा काटने की मशीन तथा गायों के रखरखाव के लिए शेड निर्माण जैसे अनुमन्य व्यय शामिल हैं। अनुमन्य मदों पर हुए वास्तविक व्यय का 40 प्रतिशत, अधिकतम 80 हजार रुपये तक अनुदान दिए जाने का प्रावधान है। गायों का तीन वर्ष के लिए पशु बीमा तथा क्रय स्थल से इकाई स्थापना स्थल तक ट्रांजिट बीमा कराया जाना आवश्यक है।
*स्वदेशी नस्ल के संवर्धन के साथ बढ़ेंगे आय के अवसर
योजना का उद्देश्य स्वदेशी उन्नत नस्ल की गायों के संरक्षण एवं संवर्धन के साथ दुग्ध उत्पादन और प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता में वृद्धि करना है। इसके साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को स्वरोजगार से जोड़ते हुए नवयुवकों एवं महिलाओं के लिए आय के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। चयनित लाभार्थियों द्वारा इकाइयां स्थापित किए जाने से जनपद में उन्नत स्वदेशी नस्ल की गायों के पालन को और प्रोत्साहन मिलेगा।