स्वाद दुनिया के मैंने चखे हैं बहुत,खट्टे मीठे अनेकों तरह के मिले, ललित लखन लाल जोशी
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस हमीरपुर l स्थानीय नगर के महर्षि दयानंद सरस्वती विद्या मंदिर आर्य समाज में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की ओर से महर्षि व्यास जयंती गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष में न्यास का अनिवार्य कार्यक्रम संपन्न हुआ। समारोह के मुख्य अतिथि प्रदेश महामंत्री डॉ. महेश पांडे बजरंग ने दीप प्रज्वलित कर एवं सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर आत्मवो और आत्मवोध से विश्ववोध पर परिचर्चा तथा काव्य गोष्ठी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर साहित्य परिषद के जिलाध्यक्ष पूर्व प्रवक्ता लखनलाल जोशी द्वारा मुख्य अतिथि परिषद के प्रदेश महामंत्री डॉ.पांडे का शाल भेंटकर एवं माल्यार्पण कर सारस्वत सम्मान किया गया। इसके साथ ही आर्य समाज के प्रधान रामबिहारी शुक्ला का तथा मौदहा निवासी जगदीश व्यास, कामता प्रसाद एवं नाथूराम पथिक का अंग वस्त्र सहित सम्मान किया गया। हरिराम गुप्त निरपेक्ष ने सरस्वती वंदना के साथ काव्य गोष्ठी एवं कविता पाठ का कार्यक्र संपन्न कराया। गोष्ठी की अध्यक्षता कामता प्रसाद विश्वकर्मा ने की। सुंदर संचालन परिषद के जिला मंत्री कैलाश प्रसाद सोनी ने किया। विशिष्ट अतिथि जालौन उरई निवासी भीम सिंह यादव का परिषद की ओर से अंग वस्त्र भेंट कर सम्मान किया गया। इसका काव्य गोष्ठी में नाथूराम पथिक ने कविता पढ़ते हुए कहा कि हाथा घोड़ा ऊंट निगोड़ा, यह वजीर दोश हाजादा।
नारायण प्रसाद रसिक ने कहा कि माता-पिता से बढ़कर कोई गुरु नहीं है, इसकी शक्ति के आगे बृहस्पति भी गुरु नहीं है। ललित लखन लाल जोशी ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि स्वाद दुनिया के मैंने चखे है,बहुत खट्टे मीठे अनेकों तरह के मिले हैं। हरि निरपेक्ष ने कहा कि शनै: शनै: होता गया अंत: करण कठोर,मानवता यदि लक्ष्य तो चलो सरलता ओर। इस काव्य गोष्ठी में तमाम कवियों ने अपनी-अपनी रचनाओं को सुनाते हुए लोगों का मनोरंजन किया।