भ्रष्टाचार मामले में तीन कर्मचारियों पर कार्रवाई
- जांच के बाद एक बर्खास्त, दूसरा निलंबित और तीसरे की पदावनति
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। नगर निगम में भ्रष्टाचार के बीच कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) में अनियमितताओं के मामलों में बड़ी कार्रवाई हुई है। तीन अलग-अलग मामलों में केडीए ने तीन कर्मचारियों पर कार्रवाई की। चार भूखंडों की फर्जी रजिस्ट्री के मामले में लिपिक प्रदीप कुमार सविता को बर्खास्त कर दिया गया।वहीं, पूर्व वीसी के पीए रहे लिपिक कश्यप कांत दुबे को विवादित प्रॉपर्टी का दोबारा आवंटन करने के मामले में निलंबित किया गया। इसके अलावा 12 लाख रुपए की घूस के आरोप में पूर्व में निलंबित अमीन संतोष कुमार का डिमोशन मूल वेतनमान पर किया गया है। मुखर्जी विहार के चार भूखंडों की फ्री-होल्ड रजिस्ट्री में अनियमितता की शिकायत के बाद केडीए में जांच शुरू हुई थी। मामला भूखंड संख्या 05, 13 एचआईजी, 10 एचआईजी और भूखंड संख्या 11 से जुड़ा है। आरोप था कि गलत जानकारी देने और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर इन भूखंडों की रजिस्ट्री कराई गई। जेई अमनदीप तिवारी की जांच अधिकारी बनाया फिर केडीए सचिव अभय कुमार पांडेय ने मामले की दोबारा जांच की। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर केडीए वीसी ने लिपिक प्रदीप कुमार सविता को बर्खास्त कर दिया। दूसरी कार्रवाई अमीन संतोष कुमार के खिलाफ हुई। केडीए में मुआवजे के भुगतान से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता को 1.38 करोड़ रुपए से अधिक का मुआवजा मिलने के बाद संतोष कुमार ने उससे ब्लैंक चेक लिया और 12 लाख रुपए दूसरे व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर कराए। इसके बाद टीडीएस प्रमाणपत्र जारी करने के लिए दोबारा 12 लाख रुपए मांगने का आरोप लगा। संतोष कुमार को मई 2025 में निलंबित किया गया था। बाद में हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें बहाल कर दिया गया। जांच जारी रहने के बाद अब उन्हें अमीन के मूल वेतनमान पर स्थायी रूप से पदावनत कर दिया गया है। तीसरी कार्रवाई वरिष्ठ लिपिक कश्यप कांत दुबे के खिलाफ हुई। आरोप है कि उन्होंने एक विवादित प्रॉपर्टी को खाली दिखाकर दोबारा प्लॉट का आवंटन कर दिया, जिससे विवाद की स्थिति पैदा हुई। मामले में उन्हें निलंबित कर दिया गया है। कश्यप कांत दुबे पूर्व केडीए वीसी के पीए भी रह चुके हैं।