कांशीराम कॉलोनी में गूंजी "गणपति बप्पा मोरया" की जयकार-धर्म, संस्कार और समरसता की त्रिवेणी बनी कांशीराम कॉलोनी की गणेश स्थापना
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। शहर के कांशीराम कॉलोनी फेज वन में विराजे गणपति बप्पा के दरबार में इस बार भी आस्था का सैलाब उमड़ा। 14 सितंबर से प्रारंभ हुआ यह 11 दिवसीय गणेशोत्सव अपने आप में एक अनूठी कहानी समेटे हुए है — यह कहानी है त्याग की, सेवा की, और उस सामाजिक क्रांति की, जिसे मूर्त रूप दिया है किन्नर समाज की सम्मानित समाजसेविका रोली गुड़िया ने।जब आस्था बनी संकल्प, तो 11 साल से नहीं रुका कारवांयह कोई एक-दो साल का आयोजन नहीं। पूरे 11 वर्षों से रोली गुड़िया अपनी निजी कमाई से इस महोत्सव को न सिर्फ आयोजित कर रही हैं, बल्कि हर वर्ष इसे और भव्य बनाती जा रही हैं। न कोई सरकारी सहायता, न कोई बड़ा प्रायोजक — बस एक अटूट संकल्प और गणपति बप्पा के प्रति अगाध श्रद्धा, जिसने इस आयोजन को कांशीराम कॉलोनी की पहचान बना दिया है।महोत्सव के दौरान हर शाम सजे मंच पर विख्यात कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा। ढोल-नगाड़ों की गूंज, भक्ति गीतों की स्वर लहरियां और श्रद्धालुओं की तालियों की गड़गड़ाहट — पूरा माहौल भक्तिमय हो उठा। विशिष्ट अतिथियों का रोली गुड़िया ने स्वयं तिलक लगाकर, माल्यार्पण कर भव्य स्वागत किया, तो अतिथियों ने भी कलाकारों को इनाम देकर उनका मनोबल बढ़ाया।"यह मेरा नहीं, बप्पा और कॉलोनी का आशीर्वाद है" — रोली गुड़ियाकार्यक्रम की मुख्य संयोजक रोली गुड़िया विनम्रता से कहती हैं कि इस आयोजन की सफलता का श्रेय अकेले उन्हें नहीं जाता। "यह भगवान गणेश की असीम कृपा है, और फेज वन-फेज टू के हर उस नागरिक का आशीर्वाद है, जिसने कभी साथ नहीं छोड़ा।" उनकी यह विनम्रता ही उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करती है।जहां समाज ने पीठ दिखाई, वहां रोली गुड़िया ने थामा हाथलेकिन रोली गुड़िया की असली पहचान गणेशोत्सव तक सीमित नहीं है। समाज के उस तबके से आकर, जिसे अक्सर हाशिये पर धकेल दिया जाता है, उन्होंने खुद को सेवा के सबसे ऊंचे पायदान पर स्थापित किया है। हर साल अपनी निजी बचत से वे 11 गरीब कन्याओं का कन्यादान कराती हैं — बिना किसी दिखावे के, बिना किसी अपेक्षा के।सोचिए — जिस समाज को अक्सर उपेक्षा और तिरस्कार झेलना पड़ता है, वही समाज आज दूसरों की बेटियों का हाथ पीले करा रहा है। यह सिर्फ एक सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि उस पूर्वाग्रह पर करारा तमाचा है, जो वर्षों से किन्नर समाज को हाशिये पर धकेलता आया है।आस्था का उत्सव, सामाजिक क्रांति का संदेश25 सितंबर तक चलने वाला यह गणेश चतुर्थी पर्व, कांशीराम कॉलोनी में सिर्फ मूर्ति विसर्जन के साथ खत्म नहीं होगा — यह हर साल एक नई प्रेरणा, एक नया संदेश छोड़ जाता है कि सेवा और करुणा का कोई जाति, धर्म या पहचान नहीं होता।रोली गुड़िया की यह गाथा केवल एक समाचार नहीं, बल्कि समाज के मुंह पर करारा जवाब है। जो समाज किन्नर समुदाय को हेय दृष्टि से देखता आया है, उसी समाज के लिए रोली गुड़िया जैसी शख्सियतें आईना बन गई हैं। यह गणेशोत्सव सिर्फ भक्ति का पर्व नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे बड़ी इबादत का प्रमाण है। दैनिक जन अधिकार समाचार रोली गुड़िया के इस अथक सेवाभाव को नमन करता है और कामना करता है कि उनका यह पुण्य कार्य युगों-युगों तक इसी तरह प्रेरणा बांटता रहे।