कंस के कारागार में भगवान का प्राकट्य, गोकुल में गूंजा नंदोत्सव
— गिरिराज भगवान को लगा छप्पन भोग
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में संपन्न हुआ। श्रीमद्भागवत एवं व्यास पूजन के बाद कथा का शुभारंभ किया गया। वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास पंडित दीपक कृष्ण जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म, बाल लीलाओं और गोवर्धन पूजा का विस्तार से वर्णन किया। कथा व्यास ने बताया कि अपने भक्तों के मन की कामनाओं को पूर्ण करने के लिए भगवान समय-समय पर धरती पर अवतार लेते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा के कंस कारागार में देवकी और वसुदेव के यहां चतुर्भुज रूप में प्रकट होकर दर्शन दिए। इसके बाद भगवान की प्रेरणा से वसुदेव जी उन्हें यमुना पार कर गोकुल में नंद भवन ले गए और माता यशोदा के पास छोड़ आए।
उधर कंस जब माया रूपी कन्या को मारने पहुंचा तो वह कन्या आकाश में चली गई और आकाशवाणी के माध्यम से कंस को चेतावनी दी कि जिससे उसे भय है, उसका जन्म हो चुका है। इसके बाद गोकुल में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की खुशी में नंदोत्सव मनाया गया।
कथा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए बताया गया कि कंस ने भगवान को मारने के लिए पूतना, अघासुर, बकासुर और धेनुकासुर जैसे राक्षसों को गोकुल भेजा, लेकिन भगवान ने अपनी बाल लीलाओं के दौरान ही उनका संहार कर दिया। भगवान ने ग्वाल-बालों के साथ गौचारण किया और इसी कारण गोपाल कहलाए।महाराज ने बताया कि गोपियों के प्रेम और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान उनके घरों में जाकर माखन खाते थे, जिसके कारण उन्हें माखनचोर भी कहा गया। भगवान ने तृणावर्त का वध कर वायु तत्व और कालिया नाग का मर्दन कर जल तत्व की शुद्धि का संदेश दिया। वहीं माटी खाने की लीला के माध्यम से भगवान ने अपने भीतर क्षमा तत्व को समाहित किया।