श्रीराम कथा के छठवें दिन वनवास प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन
वरिष्ठ संवाददाता हरि ओम
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस प्रयागराज।यमुनानगर अन्तर्गत नारीबारी क्षेत्र के बड़ी जूही में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित नौ दिवसीय भव्य श्रीराम कथा के छठवे दिवस कथा व्यास अंतरराष्ट्रीय कथा वाचिका पूज्या शास्त्री शाकाम्भरी द्विवेदी जी मानस मंजरी प्रयागराज ने भगवान श्रीराम के वनवास प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान भगवान श्रीराम के त्याग मर्यादा कर्तव्यनिष्ठा एवं माता-पिता के प्रति समर्पण की मार्मिक व्याख्या सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।कथा व्यास ने बताया कि महाराज दशरथ द्वारा माता कैकेयी को दिए गए दो वरदानों के कारण भगवान श्रीराम को चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करना पड़ा।प्रभु श्रीराम ने पिता के वचन की मर्यादा बनाए रखने के लिए राजमहल के सुखों का त्याग कर सहर्ष वन जाना स्वीकार किया। माता सीता और अनुज लक्ष्मण भी उनके साथ वन को प्रस्थान कर गए।पूज्या शास्त्री शाकाम्भरी द्विवेदी ने कहा कि श्रीराम वनवास प्रसंग हमें सिखाता है कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हो हमें सत्य धर्म और अपने कर्तव्यों के मार्ग पर सदैव चलना चाहिए।भगवान श्रीराम का जीवन त्याग प्रेम भाईचारे और मर्यादा का अनुपम उदाहरण है। उनके आदर्शों को अपनाकर समाज में संस्कार सद्भाव और नैतिक मूल्यो को मजबूत किया जा सकता है।नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से श्रीराम कथा का श्रवण किया। कथा स्थल पर भक्ति का वातावरण बना रहा तथा जय श्रीराम के जयघोष से पूरा परिसर गुंजायमान होता रहा।आयोजन:श्री नव दुर्गा उत्सव समिति ग्राम बड़ी जूही नारीबारी प्रयागराज।मुख्य आयोजक:महेश जायसवाल।छैल बिहारी दास मानस केसरी शिवम द्विवेदी-प्रदेश मीडिया प्रभारी अखिल भारत हिंदू महासभा सहयोगी कार्यकर्ता:जितेन्द्र जायसवाल विशाल जायसवाल दीपक जायसवाल ऋषभ जायसवाल एवं आयुष जायसवाल सहित समस्त भक्तगण।
|