हुज्जतुल इस्लाम ने उलूम व फुनून अपने वालिद आला हज़रत से किये हासिल
-तन्ज़ीम बरेलवी उलमा-ए-अहले सुन्नत के ज़ेरे एहतिमाम चमनगंज मे मनाया गया उर्स हामिदी
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | तन्ज़ीम बरेलवी उलमा-ए-अहले सुन्नत के ज़ेरे एहतिमाम चमनगंज मे उर्स हामिदी मनाया गया इस मौक़े पर तन्ज़ीम के सदर मुहाफिज़-ए-नामूसे रिसालत हाफिज़ व क़ारी सैयद मोहम्मद फ़ैैसल जाफ़री ने कहा कि हुज्जतुल इस्लाम हज़रते अल्लामा हामिद रज़ा ख़ाँ बरेलवी अलैहिर्रहमा की विलादत माहे रबीउल अव्वल 1292 हिजरी में बरेली के मोहल्ला सौदाग्रान में हुईहुज्जतुल इस्लाम आपका खिताब है जब्कि जमालुल औलिया के लक़ब से भी आपको याद किया जाता हैआप सरकारे आला हज़रत के बड़े शहज़ादे (बेटे) हैं और आपने तमाम उलूम व फुनून अपने वालिदे करीम से ही हासिल किये।बैअत का शर्फ हज़रते सय्यद अबुल हुसैन अहमद नूरी मारहरवी अलैहिर्रहमा से हासिल है आला हज़रत आपसे बड़ी मोहब्बत करते थे क्यूँकि एैसा लाएक़ व फाएक़ बेटा क़िस्मत वालों को ही मिला करता है। आप भी हर क़दम पर अपने वालिदे करीम के साथ रहे, तस्दीक़ाते हुसामुल हरमैन और अद दौलतुल मक्कीया से लेकर फुर्क़हाए बातिला की सरकूबी के लिये हर मोड़ पर अपने वालिदे करीम का साथ दिया। बिहार के एक जलसा में सरकारे आला हज़रत को बुलाया गया, मसरूफियत के सबब आप ना जा सके तो अपने बेटे हामिद रज़ा को भेज दिया और उनके हाथ जलसा वालों के नाम एक तहरीर भेजी जिसमें लिखा था कि,, अगर्चे मैं अपनी मसरूफियत के सबब हाजिर ना हो सका मगर हामिद रज़ा को भेज रहा हूँ जो मेरे क़ाएम मक़ाम हैं, इन्हें हामिद रज़ा नहीं अहमद रज़ा ही समझना,,आप अपने विसाल के हालात एक साल पहले ही बयान करने लगे थे और विसाल का बयान करते फरमाते थे कि ज़बान अगर दुरूद पढ़ती रहेगी तो मेरी रूह को तस्कीन मिलेगी 17 जमादिल ऊला 1362 हिजरी दौराने नमाज़े इशा आलमे तशह्हुद (अत्तहिय्यात पढ़ते वक्त) मे आपकी रूह क़ब्ज़ हुई और आपका जनाज़ा मोहद्दिसे आज़मे पाकिस्तान अल्लामा सरदार अहमद ने अदा कराई आपका मज़ार रौज़ए आला हज़रत के मगरिब की जानिब गुम्बदे रज़ा के नीचे बरेली शरीफ मे है इस मौक़े पर फातिहा ख्वानी हुई और दुआ की गई फिर शीरनी तक़सीम हुई इस मौक़े पर हाफिज़ इरफान रज़ा क़ादरी,हाफिज़ मोहम्मद खालिद,इम्तियाज अहमद बब्लू,इमरान लाला,रईस पहलवान,मोहम्मद मोईन जाफरी आदि लोग मौजूद थे!