सीएसजेएमयू की विद्या परिषद की बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर
- बीटेक, बीडेस, बीबीए और बीकॉम ऑनर्स की फीस बढ़ाने के प्रस्ताव पर चर्चा
- पीएचडी कोर्स वर्क में शामिल होगा ‘एआई इन रिसर्च’, नए विषयों और सीटों में वृद्धि पर भी मंथन
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में मंगलवार को सेंटर फॉर एकेडमिक्स में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में विद्या परिषद की बैठक आयोजित की गई। बैठक में शैक्षणिक सत्र 2027-28 के लिए नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत, विभिन्न व्यावसायिक एवं तकनीकी पाठ्यक्रमों की शुल्क संरचना में संशोधन, पीएचडी कार्यक्रमों के शैक्षणिक प्रावधान, प्रवेश प्रक्रिया और शोध कार्यों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया गया। भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दीनदयाल शोध केंद्र के अंतर्गत ज्योतिषशास्त्र और वास्तुशास्त्र में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई। वहीं, इंजीनियरिंग, डिजाइन और प्रबंधन के पाठ्यक्रमों की फीस में संशोधन के प्रस्ताव भी बैठक के प्रमुख विषय रहे।बैठक में पूर्व में आयोजित विद्या परिषद की बैठकों में लिए गए निर्णयों के अनुमोदन और उन पर की गई कार्यवाही की समीक्षा भी की गई।
इसके अतिरिक्त विभिन्न स्कूलों, विभागों, शोध एवं विकास प्रकोष्ठ और परीक्षा समिति से प्राप्त प्रस्तावों को परिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया। - दीनदयाल शोध केंद्र में शुरू होंगे ज्योतिष और वास्तुशास्त्र के पाठ्यक्रमविश्वविद्यालय के दीनदयाल शोध केंद्र के अंतर्गत शैक्षणिक सत्र 2027-28 से भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित दो नए चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इनमें बैचलर ऑफ आर्ट्स (शास्त्री) वास्तुशास्त्र और बैचलर ऑफ आर्ट्स (शास्त्री) ज्योतिषशास्त्र शामिल हैं। दोनों पाठ्यक्रमों की अवधि चार वर्ष निर्धारित की गई है। प्रत्येक पाठ्यक्रम में 30 सीटें प्रस्तावित हैं, जबकि शुल्क 26,200 रुपये रखा गया है।इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत वास्तुशास्त्र और ज्योतिषशास्त्र के व्यवस्थित अध्ययन का अवसर उपलब्ध कराने की योजना है। विश्वविद्यालय में पारंपरिक ज्ञान के अध्ययन को अकादमिक स्वरूप देने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।- योग के दो कौशल प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों का प्रस्तावविश्वविद्यालय परिसर स्थित शारीरिक शिक्षा विभाग की ओर से योग आधारित दो कौशल प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया। इनमें योगा फॉर डायबिटीज प्रिवेंशन एंड मैनेजमेंट और योगा फॉर कॉरपोरेट सेक्टर शामिल हैं। पाठ्यक्रमों की प्रस्तावित अवधि तीन माह फीस पांच हजार है। जिसका उद्देश्य मधुमेह की रोकथाम और प्रबंधन से संबंधित योगाभ्यास की जानकारी उपलब्ध कराना है। दूसरे पाठ्यक्रम में कॉरपोरेट क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप योग के उपयोग और उसकी प्रासंगिकता पर ध्यान दिया जाएगा। स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के अंतर्गत संचालित बीएससी-एमएससी इंटीग्रेटेड कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को नए विषयों के विकल्प उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा गया। इसके तहत सांख्यिकी और पर्यावरण विज्ञान को अतिरिक्त विषयों के रूप में शामिल करने पर विचार किया गया। - बीटेक की वार्षिक शिक्षण शुल्क में भी परिवर्तनबैठक के प्रमुख विषयों में स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के अंतर्गत संचालित बीटेक पाठ्यक्रमों की शुल्क संरचना में संशोधन शामिल रहा। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से बीटेक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, केमिकल इंजीनियरिंग तथा मैटेरियल्स साइंस एंड मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग की शिक्षण शुल्क में बढ़ोत्तरी का अनुमोदन किया गया।- बीबीए और बीकॉम ऑनर्स की फीस में संशोधन पर मंथनविश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट में संचालित बीबीए और बीकॉम ऑनर्स पाठ्यक्रमों के शिक्षण शुल्क में बढ़ोत्तरी का अनुमोदन किया गया।*-पीएचडी कोर्स वर्क में शामिल होगा ‘एआई इन रिसर्च’*विश्वविद्यालय के शोध एवं विकास प्रकोष्ठ की ओर से पीएचडी कार्यक्रमों को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। इनमें शोधार्थियों के कोर्स वर्क में ‘एआई इन रिसर्च’ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इन रिसर्च) नामक एक क्रेडिट का पाठ्यक्रम शामिल करने का प्रस्ताव प्रमुख रहा।- उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने की तैयारीपीएचडी शोधार्थियों के कोर्स वर्क में उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देने से जुड़े प्रस्ताव भी बैठक का हिस्सा रहे। इसमें उद्योग-प्रायोजित पार्ट-टाइम पीएचडी शोधार्थियों के कोर्स वर्क और उनकी अंकतालिका में आवश्यक प्रविष्टियों की व्यवस्था पर विचार किया गया।इस पहल का उद्देश्य उद्योगों में कार्यरत पेशेवरों और विश्वविद्यालय के बीच शोध एवं अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहित करना है। इसके अतिरिक्त शोधार्थियों के अनुरोध पर फुल-टाइम से पार्ट-टाइम पीएचडी श्रेणी में परिवर्तन से संबंधित आवेदनों पर विचार करने का प्रस्ताव भी रखा गया।बैठक में प्रो.राजेश कुमार द्विवेदी, निदेशक सीडीसी, प्रो.वृष्टि मित्रा डीन एकेडेमिक, प्रो. शशि किरण मिश्रा, डीन प्रोजेक्ट और संसाधन सृजन, प्रो.नमिता तिवारी, अधिष्ठाता शोध एवं विकास, प्रो. नीरज कुमार सिंह, डीन प्रशासन, डॉ. मोहित कुमार, निदेशक आईक्यूएसी, राकेश कुमार मिश्रा कुलसचिव, राकेश कुमार परीक्षा नियंत्रक आदि लोग उपस्थित रहे।
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