लैंबॉर्गिनी हादसा: मुख्य आरोपी शिवम मिश्रा को मिली जमानत
- पुलिस की रिमांड अर्जी कोर्ट ने की खारिज
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। शहर के बहुचर्चित लैंबॉर्गिनी हादसे के मुख्य आरोपी शिवम मिश्रा को गुरुवार को स्थानीय अदालत से बड़ी राहत मिल गई है। वकीलों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल और अदालती कामकाज के बहिष्कार के बावजूद इस मामले में विशेष सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने शिवम की जमानत मंजूर करते हुए पुलिस की रिमांड अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया।पुलिस ने आरोपी शिवम से पूछताछ के लिए उसकी रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने इसे आधारहीन करार दिया। कोर्ट ने शिवम को 20,000 रुपये के निजी मुचलके पर जमानत देने का आदेश दिया। हालांकि, अदालत ने यह शर्त भी रखी है कि आरोपी को विवेचना (जांच) में पूरा सहयोग करना होगा और पुलिस द्वारा बुलाए जाने पर उपस्थित होना होगा। पुलिस का दावा है कि शिवम जांच में सहयोग नहीं कर रहा था और गुरुवार सुबह 8 बजे वह एंबुलेंस के जरिए भागने की फिराक में था, जिसके बाद उसे उसके घर के सामने से गिरफ्तार किया गया। गौरतलब है कि हादसे के बाद से ही उसके पिता, तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा, अपने इकलौते बेटे को बचाने के प्रयास में जुटे थे। पहले उन्होंने घटनास्थल से बेटे को हटवाया और फिर सार्वजनिक तौर पर दावा किया था कि गाड़ी शिवम नहीं चला रहा था। इस मामले में पहले से ही चर्चा थी कि धाराएं 7 वर्ष से कम सजा वाली होने के कारण पुलिस स्तर पर ही जमानत दी जा सकती थी, जिसका जिक्र बार पदाधिकारियों ने भी किया था। फिलहाल, जमानत मिलने के बाद रिहाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हादसे का शिकार हुए सोनू त्रिपाठी ने उस रात की भयावहता बयां करते हुए बताया मैं और मेरा भाई विशाल सड़क किनारे दुकान पर टी-शर्ट देख रहे थे। तभी काल बनकर आई तेज रफ्तार लैंबॉर्गिनी ने पहले एक ऑटो को उड़ाया और फिर हमारी बुलेट को कुचल दिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि विशाल और दो अन्य युवक हवा में 10 फीट उछलकर दूर जा गिरे। चारों तरफ खून और चीख-पुकार मची थी। हादसे के बाद से ही चर्चित तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा अपने इकलौते बेटे को बचाने की हर संभव कोशिश करते दिखे। 8 फरवरी को हादसे के फौरन बाद उन्होंने बेटे को मौके से हटवाया और मीडिया के सामने दावा किया था कि गाड़ी शिवम नहीं चला रहा था। हालांकि, सीसीटीवी और चश्मदीदों के दावों ने इन दलीलों को कमजोर कर दिया।