स्वीकृति की प्रत्याशा में’ फंसी ठेकेदारों की करोड़ों की जमानत राशि
- पीडब्लूडी की शिथिल और लापरवाह कार्यशैली से ठेकेदार आर्थिक तंगी व हैरेसमेंट का शिकार
- टेंडरों की जमानत राशि महीनों फंसने से हतोत्साहित हो रहे ठेकेदार
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट, यानि लोक निमार्ण विभाग की लापरवाह और शिथिल कार्यशैली के कारण सैकड़ों ठेकेदारों की करोड़ों की रकम विभाग में फंसी है। ये रकम ठेकेदारों से टेंडर की जमानत धनराशि के रूप में जमा करवाई जाती है, जो टेंडर कॉस्ट की 10 परसेंट तक होती है, और ईएमडी से जमा करवाई जाती है। टेंडर भरवाकर विभाग महीनों तक उन्हें स्वीकृति के लिये लटका कर ठेकेदारों का उत्पीड़न कर रहा है। देर करने का छिपा मकसद, नये या सामान्य ठेकेदारों को हतोत्साहित करके, चहेतों को ठेके बांटने का होता है। इतना ही नहीं, टेंडर कॉस्ट या प्रॉसेसिंग फीस के रूप में जो 2 से 50 हजार रूपये तक की धनराशि ली जाती है, उससे तो ठेकेदारों को पूरी तरह हाथ धोन ही पड़ रहे हैं। वो तो नॉन रिफंडेबल होने के कारण सरकार जब्त ही कर लेती है।
लोक निर्माण विभाग के कॉन्ट्रेक्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने विकास एवं विभागाध्यक्ष के प्रमुख अभियंता को पत्र भेजकर नियम-कानून और कार्यालय ज्ञाप का उल्लंघन करके अधीनस्थ खंडों द्वारा स्वीकृति की प्रत्याशा में निविदायें आमंत्रित करने की बात कही है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अकील अहमद ने भेजे गये इस पत्र में निविदाओं में बड़े पैमाने पर अनियमिततायें किये जाने का गंभीर आरोप लगाया है। अध्यक्ष अकील अहमद के अनुसार स्वीकृति की प्रत्याशा, यानि कि निविदायें आमंत्रित कर लेने के बाद महीनों तक उसे स्वीकृति के लिये लटकाये रखकर खेल किया जाता है। इससे ठेकेदारों को टेंडर फीस के नुकसान के साथ ही लंबे अरसे जमानत राशि फंसे रहने का दर्द झेलना पड़ता है। बहुत से ठेकेदार पूरी जमा पूंजी लगाकर या उधार आदि लेकर टेंडर के साथ कई लाख या करोड़ों की धनराशि जमा करते हैं। इससे ठेकेदार और उनके परिवार आर्थिक तंगी के शिकार हो रहे हैं। एसोसिएशन ने पीडब्लूडी कानपुर जोन के मुख्य अभियंता कार्यालय पर फाईनेंशियल हैंडबुक के वॉल्यूम-6 के चैप्टर-7 के प्रस्तर 375ए और 375बी के घोर उल्लंघन करने का गंभीर आरोप भी लगाया है।