हार्ट रोग से पीड़ित मरीजों के लिए कैप्सूल पेसमेकर कारगर
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | आई.एम.ए. एकेडमी ऑफ मेडिकल स्पेशियलिटीज़ कानपुर सब-चैप्टर द्वारा एक पत्रकार वार्ता का आयोजन आईएमए के सेमिनार हॉल में किया गया। इस पत्रकार वार्ता को आईएमए कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा, डॉ कुणाल सहाय, चेयरमैन आईएमए एएमएस, कानपुर, वक्ता डॉ. विवेका कुमार, चेयरमैन कार्डियोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत, नई दिल्ली, द्वितीय वक्ता डॉ. राहुल चंडोला, चेयरमैन कार्डियक सर्जरी एवं लंग ट्रांसप्लांट, आईएचएलडी हॉस्पिटल, शेख सराय, नई दिल्ली, डॉ. डॉ. गुल शगुफ्ता, संयुक्त सचिव, आईएमए कानपुर, तथा डॉ मोहित खत्री, सचिव आईएमए एएमएस ने संबोधित किया। किया/ इस पत्रकार वार्ता का विषय होने वाली सीएमई ओएन काॅरडोलाॅजी टी आई.एम.ए. कानपुर के अध्यक्ष डॉ. अनुराग मेहरोत्रा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की, तथा आए हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। डॉ कुणाल सहाय, चेयरमैन आईएमए एएमएस ने आईएमए एएमएस कानपुर के विषय मे बताया कि ये की पहली सीएमई हैं, भविष्य में इस तरह कि विभिन्न विषयों पर सीएमई का आयोजन किया जाएगा एवं कार्यक्रम का संचालन डॉ मोहित खत्री, सचिव आईएमए एएमएस ने किया तथा अंत में धन्यवाद ज्ञापन, आई.एम.ए. कानपुर की संयुक्त सचिव डॉ. गुल शगुफ्ता ने दिया। इस वैज्ञानिक सी.एम.ई. का विषय "रिसेंट एडवांस इन काॅरडोलाॅजी इन 2026" कार्यक्रम के प्रथम वक्ताः डॉ. विवेका कुमार, चेयरमैन कार्डियोलॉजी, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, साकेत, नई दिल्ली ने विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। द्वितीय वक्ताः डॉ. राहुल चंदौला, चेयरमैन कार्डियक सर्जरी एवं लंग ट्रांसप्लांट, आईएचएलडी हॉस्पिटल, शेख सराय, नई दिल्ली ने विषय पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि हार्ट रोग से पीड़ित मरीजों के लिए कैप्सूल पेसमेकर कारगर दिल्ली के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ० विवेका कुमार एवं वरिष्ठ हृदय सर्जन एवं लंग्स विशेषज्ञ डॉ० राहुल चंदौला ने जानकारी दी कि चिकित्सा के क्षेत्र में हो रही उपलब्धियों का लाभ अब सीधा मरीजों को मिलने लगा है। डॉ० विवेका कुमार एवं डॉ० राहुल चन्दोला ने बताया कि कैप्सूल बराबर पेसमेकर से सीधा मरीजों को इलाज करने में काफी राहत मिल रही है, इससे दिल की धड़कन भी सामान्य रहेगा और माँसपेशियों भी दिल की पपिग पूरी तरह से क्षमता के साथ काम करेगी, उन्होंने बताया कि कैप्सूल पेसमेकर 15 वर्ष तक काम करता है। जो पेसमेकर सीधा लगाकर लगाया जाता था, उसमें गर्दन के पास कॉलर बन्द करके नीचे बैटरी लगी थी और पेसमेकर एक तार बैट्री से जोड़ा जाता था। इससे संक्रमण होने और दूसरी जटिलतायें होती थी और एक अर्से बाद बैटरी को बदलना पड़ता था। लेकिन इस कैप्सूल पेसमेकर से यह समस्यायें नहीं रहती हैं। कैप्सूल पेसमेकर पैर की फीमोरल नस से सीधा दिल में पहुंचा दिया जाता है। हार्ट रोग पीड़ित मरीजों के लिए यह कैप्सूल पेसमेकर काफी कारगर है। इस कार्यक्रम के चेयरपर्सनः प्रो. डॉ. आर.पी.एस. भारद्वाज, पूर्व निदेशक एवं विभागाध्यक्ष कार्डियोलॉजी, एल.पी.एस. इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी, कानपुर, प्रो. डॉ. मोहम्मद अहमद, पूर्व प्रोफेसर कार्डियोलॉजी, एल.पी.एस. इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी, कानपुर तथा प्रो. डॉ. कुणाल सहाय, सीनियर कंसल्टेंट फिजीशियन एवं कार्डियो-डायबेटोलॉजिस्ट, कानपुर रहे। कार्यक्रम के पैनलिस्ट्स डॉ. डी.पी. अग्रवाल, डॉ. ए.सी. अग्रवाल एवं डॉ. नंदिनी रस्तोगी (वरिष्ठ सलाहकार फिजीशियन/डायबेटोलॉजिस्ट) कानपुर थे। इस अवसर पर डॉ. विशाल सिंह वित्त सचिव, डॉ दीपक श्रीवास्तव, वैज्ञानिक सचिव उपस्थित रहे।
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