उच्च न्यायालय के स्टे के बावजूद नगर निगम ने जारी किए पार्किंग टेंडर, ठेकेदारों में आक्रोश
- 4 साल से नगर निगम के चक्कर लगा रहे हैं पार्किंग ठेकेदार
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। उच्च न्यायालय द्वारा यथास्थिति बनाए रखने के स्पष्ट आदेश के बावजूद नगर निगम कानपुर द्वारा पार्किंग ठेकों के नए विज्ञापन प्रसारित किए जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में शहर के समस्त पार्किंग ठेकेदारों ने नगर आयुक्त को शिकायती प्रार्थनापत्र सौंपते हुए गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।
ठेकेदारों का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2021-2022 में पार्किंग टेंडर की निविदाएं स्वीकृत की गई थीं, लेकिन बाद में नगर निगम की नीतिगत त्रुटियों के कारण टेंडर निरस्त कर दिए गए। उस समय टीन शेड, पानी और शौचालय की व्यवस्था न होने का हवाला देकर ठेके रद्द किए गए थे, जबकि यह कमियां स्वयं नगर निगम की जिम्मेदारी में आती थीं। ठेकेदारों के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में उच्च न्यायालय द्वारा सभी पार्किंग ठेकों को यथास्थिति में बनाए रखने की अनुमति दी गई थी। इसके बावजूद नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रबंधन द्वारा न तो ठेकेदारों को सुचारु रूप से कार्य करने दिया जा रहा है और न ही जमा की गई धनराशि अब तक वापस की गई है। ठेकेदारों का दावा है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 की संपूर्ण धनराशि आज तक नगर निगम के पास जमा है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यथास्थिति आदेश लागू होने के बाद नए टेंडर विज्ञापित करना न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है। ठेकेदारों ने नगर आयुक्त से मांग की है कि या तो उन्हें कार्य करने दिया जाए, या उनकी जमा धनराशि ब्याज सहित वापस की जाए, अन्यथा वे उच्च न्यायालय में अवमानना की कार्यवाही करने को मजबूर होंगे। प्रार्थनापत्र में नगर आयुक्त से यह भी आग्रह किया गया है कि वे उच्च न्यायालय में नियुक्त अधिवक्ता से स्थिति स्पष्ट कर तत्काल उचित कार्यवाही करें।