महाशिवरात्रि पर्व पर काव्य गोष्ठी के जरिए कवियों ने पढ़ी नाना प्रकार की कविताएं |
सुनील कुमार धुरिया संवाददाता
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सुमेरपुर,हमीरपुर l अखिल भारतीय साहित्य परिषद जनपद इकाई हमीरपुर के तत्वावधान में महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य में वैभव परनामी के आवास पर काव्य गोष्ठी संपन्न हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि चंद्रशेखर अग्निहोत्री सचिव जिला अपराध निरोधक कमेटी हमीरपुर के जन्म दिन पर सभी कवियों ने उन्हें बधाई दी और दीर्घायु की कामना की। भगवान शिव एवं देवी सरस्वती पूजन के पश्चात कार्यक्रम के संयोजक हरीराम गुप्त निरपेक्ष ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इसी क्रम में हरीराम गुप्त निरपेक्ष ने पढ़ा, 'मंगल मूरत शिव त्रिपुरारी, नाम जपे रघुवीर मुरारी। वाम उमा छवि छाजत ऐसे, सावन में घन विद्युत जैसे।', ओज के कवि रेवती कुमार पाठक 'शेखर' ने 'जालंधर वध' पर कविता पढ़ी। वयोवृद्ध कवि नारायण प्रसाद तिवारी रसिक ने पढ़ा, सरिता की धारा में पत्थर ठोकरें खाते है, जो डरे नहीं थपेड़ों से शंकर वही बन पाते हैं।', गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे एम एल अवस्थी ने पढ़ा, 'अर्चना मा दीप बुझ कर साधना पूरी हुई यदि, तो भगवान के मिलन का उत्साह सारा व्यर्थ है।', कार्यक्रम का संचालन कर रहे संस्था के मंत्री कैलाश सोनी ने पढ़ा, 'जय माता वर दायिनी, जय शिव प्राणाधार, पूजि कमल पद आपके, सुर नर पावें पार।', गीतकार राजेन्द्र प्रेमी ने पढ़ा, 'त्रिपुरारी शंकर कैलासी मेरा प्रणाम स्वीकार करो, हे नीलकंठ शिव पार्वती मेरा प्रणाम स्वीकार करो।' गणेश सिंह विद्यार्थी ने पढ़ा, 'नीलकंठ तुम अविनाशी तुम, हे कैलाशपति शूलधारी हो। गौरा के प्यारे भोले भंडारी, त्रिपुरारी कृपा के भंडारी हो।', उमेश कुमार सोनी ने पढ़ा, 'यदि हम बंटे नहीं होते तो, सब धरती के राजा होते। विश्व गुलामी करता, अपनी ताकत का अंदाजा करते।', संस्था के उपाध्यक्ष गजलकार नीतिराज सिंह ने पढ़ा, 'नजरों ने ही जब अपनापन लाना छोड़ दिया, आईनों ने भी सच बतलाना छोड़ दिया।', संस्था के सहमंत्री गजेन्द्र नारायण दीक्षित ने पढ़ा, हे आशुतोष औघड़दानी, हे नीलकंठ प्रभु पंचानन, हे गुणागार, हे त्रिपुरारी, हे कलातीत बम बम भोले।', विशिष्ट अतिथि मानसकार आनन्द कुमार सिंह ने रामचरित मानस में दिए गए भगवान शिव के अहम (अहंकार) स्वरूप का वर्णन करते हुए कहा, 'प्रभु समरथ सर्वत्र शिव सकल कला गुण धाम, योग ज्ञान वैराग्य निधि प्रनत कला तस नाम।'