उप्र पावर कॉर्पोरेशन को आउटसोर्स सेवा निगम के प्राविधानों में शामिल करने की मांग
-संविदा कर्मचारियों के शोषण पर जताई कड़ी आपत्ति
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि उ0प्र0 पावर कॉर्पोरेशन लि0 के अधीन केस्को डिस्कॉम को नवगठित उ0प्र0 आउटसोर्स सेवा निगम के प्राविधानों के अंतर्गत तत्काल शामिल किया जाए, ताकि संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके। संघर्ष समिति ने इस सम्बन्ध में पॉवर कार्पोरेशन प्रबंधन द्वारा शासन को भेजे गये पत्र का विरोध किया है जिसमें पॉवर कार्पोरेशन को आउटसोर्स सेवा निगम से अलग रखने की बात की गई है। संघर्ष समिति ने कहा है कि वर्तमान में पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन द्वारा संविदा कर्मचारियों के साथ व्यापक स्तर पर भेदभाव और शोषण किया जा रहा है। लंबे समय से कार्यरत हजारों कर्मचारियों को नियमितीकरण या समायोजन का लाभ नहीं दिया जा रहा है तथा समान कार्य के बावजूद वेतन भुगतान में भारी असमानता है।संघर्ष समिति ने यह भी बताया कि कई मामलों में श्रम कानूनों का उल्लंघन करते हुए संविदा कर्मचारियों को बोनस, अवकाश तथा अन्य वैधानिक सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। इसके विपरीत ठेकेदारों को अनावश्यक वित्तीय लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों का आर्थिक और सामाजिक शोषण हो रहा है।
संघर्ष समिति के अनुसार इन कर्मचारियों से लाइनमैन, उपकेंद्र परिचालन, कंप्यूटर ऑपरेटर, मीटर रीडर, वाहन चालक, हेल्पर आदि कार्य कराए जा रहे हैं लेकिन पर्याप्त प्रशिक्षण, सुरक्षा उपकरण एवं सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इसके परिणामस्वरूप दुर्घटनाओं में वृद्धि हो रही है तथा अनेक कर्मचारी असमय मृत्यु या स्थायी दिव्यांगता का शिकार हो रहे हैं।संघर्ष समिति ने बताया कि पिछले कई वर्षों से कार्य कर रहे सैकड़ों संविदा कर्मचारियों को मनमाने तरीके से सेवा से हटाया गया है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण एवं श्रम कानूनों के विरुद्ध है। साथ ही जांच रिपोर्टों के बावजूद ईपीएफ आदि मदों में अनियमितता करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।संघर्ष समिति ने कहा है कि सैनिक कल्याण निगम के माध्यम से तैनात कर्मचारियों और अन्य संविदा कर्मचारियों के वेतन में भी भारी अंतर है, जो समान कार्य के सिद्धांत का उल्लंघन है।संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि केस्को को आउटसोर्स सेवा निगम के अंतर्गत लाया जाए, सभी संविदा कर्मचारियों को निर्धारित मानकों के अनुसार वेतन एवं सुविधाएं दी जाएं, श्रम कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ठेकेदारों की अनियमितताओं की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए, लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि संविदा कर्मचारियों के हितों की रक्षा हेतु शीघ्र ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो इसकी तीखी प्रतिक्रिया होगी और बिजली कर्मियों को आंदोलन हेतु बाध्य होना पड़ेगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रबंधन एवं सरकार की होगी।