अवकाश और त्योहारों के दिन भी कर्मचारियों-इंजीनियरों को ड्यूटी पर बुलाना अनुचित
- प्रतिकर अवकाश या दुगने वेतन का भुगतान किया जाए: संघर्ष समिति
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, केस्को ने प्रबंधन द्वारा अवकाश, साप्ताहिक अवकाश तथा त्योहारों के दिनों में भी बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों को नियमित रूप से ड्यूटी पर बुलाए जाने की प्रथा पर कड़ी आपत्ति जताई है। संघर्ष समिति ने कहा है कि यह व्यवस्था कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव डालने वाली है और इसे तत्काल बंद किया जाना चाहिए। वर्ष 2000 में जब उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद का विघटन हुआ था, उस समय प्रदेश में लगभग 60 लाख उपभोक्ता थे और लगभग 1 लाख 20 हजार नियमित कर्मचारी कार्यरत थे। वर्तमान में प्रदेश में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़कर लगभग 3 करोड़ 73 लाख हो गई है, जबकि नियमित कर्मचारियों की संख्या घटकर मात्र लगभग 32 हजार रह गई है तथा रिक्त पदों पर कुछ संविदा कर्मचारियों की भर्ती कर कार्य लिया जा रहा है अभी भी काफी संख्या में पद रिक्त हैं, कर्मचारियों की संख्या में इतने बड़े अंतर के बावजूद बिजली व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना कर्मचारियों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो गया है।संघर्ष समिति ने कहा कि प्रबंधन की इस नीति से बिजली कर्मियों में भारी असंतोष व्याप्त है। बिजली कर्मचारियों के भी परिवार होते हैं और अवकाश व साप्ताहिक अवकाश के दिन ही उन्हें अपने पारिवारिक दायित्व निभाने का अवसर मिलता है। त्योहारों के अवसर पर अन्य लोगों की तरह बिजली कर्मियों की भी यह स्वाभाविक इच्छा होती है कि वे अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करें।संघर्ष समिति ने मांग की है कि यदि किसी अपरिहार्य स्थिति में कर्मचारियों को त्योहार या साप्ताहिक अवकाश के दिन ड्यूटी पर बुलाया जाता है तो उन्हें नियमों के अनुसार प्रतिकर अवकाश या दुगना वेतन दिया जाए।संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि निजीकरण की नीति के तहत लगातार बिजली कर्मियों की संख्या कम की जा रही है और नई भर्तियां नहीं की जा रही हैं, जो उपभोक्ता सेवा और बिजली व्यवस्था दोनों के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होगा।