उर्वरकों के संतुलित उपयोग हेतु किसानों को किया जागरूक
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | सीएसए के अधीन संचालित जाजपुर बंजारा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा ग्राम जसमापुर में आयोजित विशेष जागरूकता अभियान के अंतर्गत फसलों में संतुलित उर्वरकों के प्रयोग पर कृषक एवं कृषक महिलाओं को भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के प्रधान वैज्ञानिक डा० देवराज मिश्रा, वरिष्ठ वैज्ञानिक डा० विश्वजीत मंडल तथा वैज्ञानिक डा० आशिक दत्ता के साथ-साथ कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों डा० भूपेन्द्र कुमार सिंह-प्रभारी, डा० महेन्द्र राजभर, डा० जगदीश मिश्रा एवं डा० दिव्या कौशिक ने संतुलित उर्वरकों का प्रयोग पर विभिन्न जानकारी देकर कृषकों को जागरूक किया। वैज्ञानिक डा० देवराज मिश्श्रा जी ने भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाये रखने हेतु संतुलित उर्वरकों के उपयोग के साथ-साथ फसल चक में ग्रीस्मकालीन दलहनी फसलों जैसे-मूंग, उर्द का समावेश करने पर जोर दिया। वैज्ञानिक डा० विश्वजीत मंडल ने बताया कि रसायनिक उर्वरकों का संतुलित प्रयोग करने के साथ-साथ फसलोत्पादन हेतु अच्छी प्रजातियो का चयन कर बुवाई करें। वैज्ञानिक डा० आशिक दत्ता ने बताया कि ऊसर भूमि को सुधारने के लिये जिप्सम के प्रयोग के साथ-साथ अच्छी प्रकार सड़ी हुयी गोबर की खाद एवं हरीखाद-दैचा का प्रयोग करने से मृदा का पी०एच० कम हो जाता है साथ ही मृदा जांच के पश्चात ही विभिन्न फसलों में आवश्यकता के अनुसार की संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें। केन्द्र के प्रभारी डा० भूपेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि आवश्यकता के ज्यादा रसायनिक उर्वरकों का प्रयोग करने से मृदा के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है साथ ही कृषकों पर अनावश्यक व्ययभार पड़ता है। कार्यक्रम का शुभारम्भ डा० महेन्द्र राजभर ने भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के वैज्ञानिकों का परिचय कराते हुये कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम के अन्त में केन्द्र के मृदा वैज्ञानिक डा० जगदीश मिश्रा जी ने बताया कि ऊसर भूमि को सुधारने हेतु जिप्सम के प्रयोग के साथ-साथ धान का पुआल एवं जलकुम्भी प्रयोग करने से मृदा में कार्बनिक पदार्थों की मात्रा बढती है जिससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है। उक्त कार्यक्रम में 15 कृषक महिलाओं एवं 35 कृषकों ने प्रतिभाग किया।
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