ग्रीष्म कालीन मूंग में कीट रोग प्रबन्धन पर हुआ कृषक प्रशिक्षण
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | सीएसए के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर द्वारा ग्राम सहतावनपूर्वा में ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल में कीट रोग प्रबंधन पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वैज्ञानिक डॉक्टर दीपक मिश्रा ने बताया कि इन प्रशिक्षणों का मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिकों के परामर्श से मूंग की उत्पादकता बढ़ाना और रासायनिक दवाओं का कम से कम उपयोग कर सुरक्षित खेती को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि प्रमुख सफेद मक्खी सबसे हानिकारक कीट है जो पीली मोज़ेक वायरस फैलाता है। नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 SL (0.35 मिली/लीटर) या थायमेथोक्साम का छिड़काव करें। तथा रस चूसक कीट के लिए डाइमेथोएट 30 EC (2.0 मिली/लीटर) या 5% नीम के तेल (NSKE) का उपयोग करें।इल्ली कीट हेतु फसल के फूल आने से पूर्व T-आकार की खूंटियां (25-30 प्रति हेक्टेयर लगाएं। इल्ली दिखने पर इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG (80 ग्राम/एकड़) या क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5% SC (100 मिली/हेक्टेयर) का छिड़काव करें। डॉ अरुण कुमार सिंह ने बताया कि पीतशिरा मोजेक पत्तियों को पीला कर देता है। इसके नियंत्रण के लिए सफेद मक्खी को नियंत्रित करना आवश्यक है।जड़ सड़न/पौध विगलन: 15-20 दिन की फसल में यह रोग दिखने पर कार्बेन्डाजिम + मेन्कोजेब (250 ग्राम/एकड़) का छिड़काव करें। वैज्ञानिक डॉक्टर शशिकांत ने किसानों को सलाह दी कि वे अपने मूंग की फसल की निगरानी करते रहे जिसे आने वाली समस्या का समाधान किया जा सके। इस अवसर पर गांव के 30 से अधिक किसान उपस्थित रहे।
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