न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और पे स्लिप में लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर नगर और कानपुर देहात की फैक्ट्रियों में हाल के दिनों में सामने आए श्रमिक असंतोष के मामलों को लेकर बुधवार को उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय, कानपुर के सभागार में श्रम आयुक्त, उत्तर प्रदेश मार्केण्डय शाही की अध्यक्षता में बैठक आयोजित हुई। बैठक में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह, पुलिस आयुक्त रघुवीर लाल, दोनों जनपदों के उद्योगपति तथा श्रमिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक में श्रम आयुक्त ने कहा कि श्रमिकों के असंतोष और धरना-प्रदर्शन के प्रमुख कारणों में निर्धारित न्यूनतम वेतन का भुगतान न होना, ओवरटाइम का भुगतान न किया जाना, साप्ताहिक अवकाश में कटौती तथा वेतन पर्ची उपलब्ध न कराना शामिल है। उन्होंने कहा कि नोएडा प्रकरण के बाद शासन द्वारा 17 अप्रैल 2026 को जारी शासनादेश के अनुसार निर्धारित न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जाना अनिवार्य है, किंतु कई स्थानों पर विशेष रूप से संविदाकारों द्वारा इसका अनुपालन नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक श्रमिक को, चाहे वह सेवायोजक के मस्टर रोल पर हो, संविदाकार के अधीन हो अथवा अन्य किसी व्यवस्था में कार्यरत हो, निर्धारित न्यूनतम वेतन दिया जाना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त सप्ताह में 48 घंटे से अधिक कार्य लेने पर प्रत्येक घंटे के लिए निर्धारित दर से दोगुना ओवरटाइम भुगतान किया जाना होगा तथा वेतन पर्ची उपलब्ध करानी होगी।
श्रम आयुक्त ने कहा कि यदि श्रम कानूनों के अनुपालन में किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो श्रम विभाग, जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा निरीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में यह भी अवगत कराया गया कि उत्तर प्रदेश सरकार उद्योगों एवं उद्यमों को निरंतर प्रोत्साहन प्रदान कर रही है। वर्तमान में प्रदेश के 32,559 कारखानों में से 17,956 कारखाने वर्ष 2017 के बाद स्थापित हुए हैं। इसके बावजूद पिछले कई वर्षों में परिवर्तनीय महंगाई भत्ते के अतिरिक्त मजदूरों के वेतन एवं पारिश्रमिक में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है, जबकि महंगाई में निरंतर वृद्धि हुई है।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने कहा कि सभी उद्यमियों को सुरक्षा प्रदान की जा रही है। श्रमिकों के नाम पर अराजकता एवं अशांति फैलाने वाले तत्वों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध श्रम अधिनियमों के साथ भारतीय न्याय संहिता के तहत भी कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि निर्धारित न्यूनतम वेतन देना श्रम अधिनियमों के तहत अनिवार्यता है। उन्होंने कहा कि न्यूनतम वेतन एवं वेतन पर्ची जैसे मूल प्रावधानों के अनुपालन को लेकर नियमित समीक्षा और कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। श्रमिक और उद्यमी एक दूसरे के पूरक हैं। उद्यमी श्रमिकों के हितों का ध्यान रखें।
बैठक में जनपद कानपुर नगर एवं कानपुर देहात के लिए लागू नई न्यूनतम वेतन दरों की जानकारी भी साझा की गई। जनपद कानपुर नगर में अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए 14,306 रुपये तथा कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन निर्धारित किया गया है। वहीं जनपद कानपुर देहात में अकुशल श्रमिकों के लिए 12,356 रुपये, अर्द्धकुशल श्रमिकों के लिए 13,590 रुपये तथा कुशल श्रमिकों के लिए 15,224 रुपये प्रतिमाह न्यूनतम वेतन निर्धारित किया गया