यूपीयूएमएस सैफई लैप्रोस्कोपिक विधि से विश्व के सबसे बड़े गॉलब्लैडर स्टोन का सफल ऑपरेशन,गैस्ट्रो सर्जन डॉ.कन्हैया लाल चौधरी ने बनाया नया कीर्तिमान
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस), सैफई ने चिकित्सा जगत में एक नई ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। विश्वविद्यालय के गैस्ट्रो सर्जरी विभाग के सर्जन डॉ. कन्हैया लाल चौधरी एवं उनकी टीम ने लैप्रोस्कोपिक तकनीक के माध्यम से विश्व के सबसे बड़े गॉलब्लैडर स्टोन (14 x 8.3 x 4.2 cm और 200 ग्राम वजन के साथ पित्ताशय की पथरी) को सफलतापूर्वक निकालकर चिकित्सा क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
जानकारी के अनुसार, 62 साल की महिला को मरीज लंबे समय से पेट दर्द, उल्टी और पाचन संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा था। जांच के दौरान उसके गॉलब्लैडर में अत्यंत विशाल आकार की पथरी पाई गई, जिसे सामान्य परिस्थितियों में ओपन सर्जरी द्वारा निकालना ही संभव माना जाता है। किंतु डॉ. कन्हैया लाल चौधरी ने आधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करते हुए इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी पथरी को लैप्रोस्कोपिक विधि से निकालना अत्यंत चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक सावधानी, अनुभव और तकनीकी दक्षता की आवश्यकता होती है। डॉ. चौधरी और उनकी टीम ने कई घंटों की कठिन सर्जरी के बाद मरीज को सुरक्षित उपचार प्रदान किया।
ऑपरेशन के पश्चात मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और तेजी से रिकवरी कर रहा है। इस उपलब्धि के बाद यूपीयूएमएस सैफई का नाम राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
विश्वविद्यालय के कुलपति मा0 डॉ अजय सिंह ने इस सफलता पर डॉ. कन्हैया लाल चौधरी एवं उनकी टीम को बधाई देते हुए इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि आधुनिक सर्जरी तकनीकों की क्षमता और भारतीय चिकित्सकों की दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
ज्ञात हो कि अभी तक विश्व की सबसे बड़ी पित्ताशय की पथरी वेनेजुएला के तट से दूर स्थित एक छोटा सा जुड़वां द्वीप गणराज्य, त्रिनिदाद और टोबैगो, लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में सभी देशों में अग्रणी है। हालांकि विशाल पित्ताशय की थैली पर ऑपरेशन करना आमतौर पर मुश्किल होता है और लैप्रोस्कोपिक प्रक्रिया से ओपन सर्जरी में परिवर्तित होने की दर भी अधिक होती है, लेकिन त्रिनिदाद और टोबैगो में एक विशाल पित्ताशय की थैली और अब तक की सबसे बड़ी पित्त पथरी को लैप्रोस्कोपिक तरीके से निकालकर लैप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी सफलतापूर्वक संपन्न हुई।