आयोजित संगोष्ठी में धर्म गुरुओं ने भरी हूंकार"सबके हैं हुसैन"
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर | शहीद ए आज़म हजरत इमाम हुसैन की याद में जिक्र शहीद ए कर्बला संगोष्ठी कर्बला के मैदान में सच्चाई पर कायम रहते हुए हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने जो अजीम कुर्बानी पेश की है उसे रहती दुनिया तक भुलाया नहीं जा सकता कुल हिंद जमीअतुल आवाम एवं अखिल भारतीय सर्व धर्म महासभा के संयुक्त तत्वाधान में कुली बाजार स्थित संस्था के कार्यालय पर हर साल की तरह इस साल भी हजरत इमाम हुसैन की शहादत को सलाम पेश करने के लिए जिक्र ए शहीदे कर्बला कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमें संस्था के बैनर तले हिंदू मुस्लिम सिख इसाई सभी धर्म के धर्म गुरुओं ने विश्व के नाम एक पैगाम दिया कि हुसैन सिर्फ मुसलमान के इमाम नहीं है बल्कि हजरत इमाम हुसैन पूरी मानवता के इमाम है उन्हें सभी धर्म संप्रदाय के लोग मानते हैं क्योंकि उन्होंने जुल्म के खिलाफ कर्बला के मैदान से आवाज बुलंद की और जालिम यजीद के सामने डट के खड़े रहे अपनी और अपने परिवार वालों की कुर्बानी पेश करके यह संदेश दिया कि हमेशा बुराई के खिलाफ आवाज बुलंद करना है! चाहे सामने जालिम कितना ही ताकतवर क्यों ना हो कार्यक्रम संयोजक महामंत्री महबूब आलम खान ने बताया कि इसी विषय पर संस्था द्वारा "सबके हैं हुसैन" संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें क्रिश्चियन समुदाय से पादरी डायमंड युसूफ जिन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हजरत इमाम हुसैन का संदेश सबको पढ़ना चाहिए क्योंकि उन्होंने कर्बला के मैदान से जो पैगाम दिया है वह सुनहरे अक्षरों में लिखे गए हैं हजरत इमाम हुसैन ने सच्चाई पर कायम रहते हुए बुराई का डटकर मुकाबला किया यह बात दुनिया का हर धर्म मजहब सीखना है उनसे हम सबको प्रेरणा लेनी चाहिए! सिख समुदाय से सरदार राजेंद्र सिंह ने कहा की दुनिया में जो लोग भी बुराई व जुल्म के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करना चाहते हैं तो उन्हें हजरत इमाम हुसैन को पढ़ना चाहिए उन्होंने कैसे जालिम यजीद के सामने ना झुकने का फैसला किया उनके इस जब्बे को हम सब सलाम पेश करते हैं! क्योंकि उन्होंने अपने चाहने वालों को भी यह संदेश दिया कि चाहे तादाद जितनी भी काम हो लेकिन हमको सच्चाई का दमन थामें रहना है! इस मौके पर पंडित राजेश मिश्रा ने कहा कि हुसैन सबके हैं आज से 1400 साल पहले हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों के ऊपर जो जुल्म हुआ उसे भुलाया नहीं जा सकता हुसैन हमेशा इंकलाब के लिए याद किए जाते रहेंगे! कारी आरिफ रजा कादरी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन दीन को बचाने के लिए जालिम हुक्मरान से टकरा गए थे क्योंकि जालिम यजीद ने उनके नाना के दीन को गलत दिशा देने का काम किया मजहब इस्लाम इंसानियत का पैगाम देने वाला मजहब है और उसके पैगंबर हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मोहसिन ए इंसानियत बनाकर दुनिया में भेजे गए हम हुसैन के मानने वाले हैं हमें उनकी अजीम कुर्बानी को हमेशा याद रखना होगा क्योंकि उनकी कुर्बानी हमको जिंदगी के हर मौके पर एक नई राह दिखाती है की हुसैन ने अपनी जान की कुर्बानी देकर दुनिया को यह दिखाया कि जब आप सच्चाई के रास्ते को चुगे तो दुनिया हमेशा आपको याद करेगी इसीलिए हुसैन जिंदा है हुसैन का नाम जिंदा आज हुसैन का नाम हर एक शख्स की जुबान पर है लेकिन जालिम यजीद का कोई नाम लेने वाला नहीं है! संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे शहर काजी कानपुर मुफ्ती साकिब मिस्बाही ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन का पैगाम सब्र करना भी सीखना है हम सबको सच्चाई के रास्ते पर चलते हुए बुराई को रोकना होगा तभी हम सच्चे हुसैनी होंगे संगोष्ठी में मुख्य रूप से महामंत्री महबूब आलम खान उपाध्यक्ष कारी आरिफ रजा कादरी उपाध्यक्ष पादरी डायमंड युसूफ राष्ट्रीय सचिव सरदार राजेंद्र सिंह सरदार हरप्रीत सिंह गोविंद पंडित राजेश मिश्रा रवि राज भारतीय डॉ अबू सामा शारिक सिद्दीकी अयाज चिश्ती शादाब रजा कानपुरी अलीम खान मोहम्मद उस्मान शारिक नवाब मोहम्मद हारुन अखलाक अहमद चिश्ती अली वारिस हाजी सलाउद्दीन इम्तियाज मदनी मौलाना जाकिर हुसैन खान गौतम संभवानी आदि मौजूद रहे |
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