सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण में बौद्ध दृष्टिकोण
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हमीरपुर l अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, लखनऊ (संस्कृति विभाग, उ0प्र0)द्वारा ग्रीष्म कालीन 'बोधि-पथ' साप्ताहिक कार्यशाला विषय :-सतत विकास एवं पर्यावरण संरक्षण में बौद्ध दृष्टि कोण दिनाँक -30 जून से 06जुलाई 2026ई0तक का आज समापन कार्यक्रम लालू सिंह पब्लिक स्कूल में सम्पन्न हुआ।इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष कवि शिवकरण सिंह 'सरस' ने कहा -'नर तन परम पवित्र शुभ, होते पर हित कर्म'। हास्य कवि दिनेश दुबे ने पढ़ा -"जीवन देता है प्रत्यक्ष, आओ खूब लगाएं वृक्ष"।
संचालक कैलाश प्रसाद सोनी ने पढ़ा -"सजग नागरिक बन कर हमको, अपना राष्ट्र बचाना है"।
कवि कमलेश सिंह 'गौर' ने पढ़ा -"धधक रहा ब्रह्माण्ड, धरा को ज्वऱ प्रचण्ड "। कार्य क्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती गीता ओमर ने बढ़ रहे ध्वनि, धरा और वायु प्रदूषण पर चिन्ता व्यक्त की। कवि हरी राम गुप्त 'निरपेक्ष' ने विपश्यना शीर्षक की कविता पढ़ते हुए कहा -
"देख!प्रकृति का दूसरा, परिवर्तन है नाम।
अद्वितीय हर मूर्त है, अद्वितीय हर काम "।
कवि हरी किशन 'सेन' औरकवि राम भूषण जी ने कविता पाठ किया। संयोजक कवि रेवती कुमार पाठक 'शेखर'जी ने कविता पढ़ते हुए कहा - हे!भोले बुन्देल खण्ड में वीर शिरोमणि चिन्मय हो।
सत्य सरलता श्रम संयम का, सदा जीतना निश्चय हो। आपने विद्यालय के विद्यार्थियों अध्यापकों तथा सहभागी कवि साहित्यकारों को बोधि - पथ कार्यशाला के प्रमाण पत्र वितरित किये।