भूजल सप्ताह विशेष: मेट्रो ने जल संरक्षण के प्रयासों से हो रहा भूजल संवर्धन
- जीरो डिस्चार्ज फैसिलिटी के मॉडल पर संचालित मेट्रो डिपो
- विकसित की 24 लाख लीटर वर्षा जल संरक्षण क्षमता
- वर्षा जल संरक्षण के लिए पिट्स और रिसाइकिल वाटर के उपयोग, पेश की मिसाल
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस भूजल के लगातार गिरते स्तर और जल संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से पूरे प्रदेश में भूजल सप्ताह मनाया जा रहा है। जल जीवन की सबसे मूलभूत आवश्यकताओं में से एक है और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी हम सभी की है। इसी सोच को आत्मसात करते हुए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) वर्षा जल संरक्षण के लिए पिट्स तथा रीसाइकल्ड वाटर के उपयोग जैसे प्रयासों के माध्यम से इस दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य कर रहा है। मेट्रो के दोनों कॉरिडोर के स्टेशनों, मेट्रो डिपो और 32.5 किलोमीटर लंबे वायाडक्ट को मिलाकर लगभग 24 लाख लीटर वर्षा जल संरक्षण क्षमता विकसित की जा रही है। वर्षा जल के संरक्षण के लिए मेट्रो द्वारा सभी आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। वायाडक्ट में प्रत्येक दूसरे स्पैन पर पानी को नीचे मीडियन में बने रिचार्ज पिट तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। कॉरिडोर-1 (आईआईटी से नौबस्ता) के अंतर्गत लगभग 250 पिट जल संरक्षण के लिए तैयार किए गए हैं। गुरुदेव चैराहा स्थित मेट्रो कॉरिडोर-1 डिपो जीरो डिस्चार्ज फैसिलिटी के तौर पर कार्य कर रहा है। इसके परिसर से कोई भी अपशिष्ट जल बाहर नहीं छोड़ा जाता। अर्थात यहां उत्पन्न होने वाले वेस्ट वाटर का निस्तारण या डिस्चार्ज नहीं किया जाता, बल्कि उसे पूरी तरह से रिसाइकिल कर विभिन्न कार्यों में पुनः उपयोग किया जाता है। इसके लिए डिपो में 10 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तथा 70 हजार लीटर प्रतिदिन क्षमता का एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) स्थापित किए गए हैं।उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग डिपो एवं वायाडक्ट क्षेत्र में बागवानी के लिए भी किया जा रहा है। कॉरिडोर-2 (सीएसए से बर्रा-8) के निर्माणाधीन डिपो में भी इसी तर्ज पर जीरो डिस्चार्ज प्रणाली विकसित की जा रही है।- बाक्स रिसाइकल्ड वाॅटर से होती है मेट्रो ट्रेनों की धुलाईकानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-1 डिपो में स्थापित ऑटोमैटिक ट्रेन वॉशिंग प्लांट में मेट्रो ट्रेनों की नियमित सफाई रिसाइकल्ड या पुनर्चक्रित जल से की जाती है। इससे बड़ी मात्रा में स्वच्छ जल की बचत होती है और जल संसाधनों का अधिकतम दक्षता के साथ उपयोग सुनिश्चित होता है। आधुनिक तकनीक से लैस यह ऑटोमैटिक वॉशिंग प्लांट कम समय में ट्रेनों की प्रभावी सफाई करता है।यूपीएमआरसी पानी की बर्बादी को कम करते हुए पानी की हर बूंद का संरक्षण कर रहा है। कॉरिडोर-1 के शेष सेक्शन (कानपुर सेंट्रल - नौबस्ता) के नवनिर्मित स्टेशनों सहित सभी कानपुर मेट्रो स्टेशनों पर उपयोग किए जाने वाले जल संबंधी उपकरण, जैसे पेयजल एवं शौचालयों में लगाए गए नल आदि, पारंपरिक जल फिटिंग्स की तुलना में 30 से 40 प्रतिशत अधिक जल-कुशल हैं। इससे प्रत्येक स्टेशन पर प्रतिवर्ष लाखों लीटर पानी की बचत होने की उम्मीद है।