सरोगेसी एवं एआरटी अधिनियमों के प्रभावी अनुपालन पर जिला बोर्ड की पहली बैठक सम्पन्न
*बिना पंजीकरण सरोगेसी, आईवीएफ व एआरटी केंद्र चलाना अवैध, चलेगा विशेष अभियान : जिलाधिकारी
*नेशनल एआरटी एवं सरोगेसी रजिस्ट्री पोर्टल पर ऑनलाइन करें आवेदन
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर नगर।जनपद में बिना पंजीकरण संचालित एआरटी एवं सरोगेसी केंद्रों तथा आईवीएफ सेवाएं प्रदान करने वाली इकाइयों के विरुद्ध जल्द विशेष अभियान चलाया जाएगा। जिलाधिकारी श्री जितेंद्र प्रताप सिंह ने निर्देश दिए हैं कि जिन केंद्रों ने अभी तक सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 एवं सहायता प्राप्त जननीय प्रौद्योगिकी (एआरटी) (विनियमन) अधिनियम, 2021 के प्रावधानों के अनुसार पंजीकरण नहीं कराया है, वे तीन दिनों के भीतर आवेदन करें। निर्धारित अवधि के बाद बिना पंजीकरण संचालित पाए जाने वाले केंद्रों के विरुद्ध अधिनियमों के तहत सख्त विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बुधवार सायं कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला जननीय प्रौद्योगिकी एवं सरोगेसी बोर्ड की प्रथम बैठक आयोजित हुई। बैठक में दोनों अधिनियमों के प्रभावी अनुपालन, पंजीकरण, निरीक्षण व्यवस्था तथा प्रवर्तन संबंधी प्रावधानों की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारी ने कहा कि सरोगेसी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के अंतर्गत सरोगेसी सेवाएं प्रदान करने के लिए पंजीकरण अनिवार्य है।
बिना वैध पंजीकरण के सरोगेसी, आईवीएफ अथवा अन्य एआरटी सेवाओं का संचालन दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में अधिनियम के तहत 10 वर्ष तक के कारावास एवं 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने निर्देश दिए कि जनपद में अपंजीकृत एआरटी एवं सरोगेसी केंद्रों तथा आईवीएफ सेवाएं प्रदान करने वाली इकाइयों की पहचान कर उनके विरुद्ध विशेष अभियान चलाया जाए।
बैठक में बताया गया कि पंजीकरण के लिए आवेदन नेशनल एआरटी एवं सरोगेसी रजिस्ट्री पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किए जाएंगे। अधिनियम के तहत चार प्रकार के केंद्रों के पंजीकरण का प्रावधान है। एआरटी बैंक एवं एआरटी क्लिनिक लेवल-1 का पंजीकरण शुल्क 50-50 हजार रुपये, जबकि एआरटी क्लिनिक लेवल-2 एवं सरोगेसी क्लिनिक का पंजीकरण शुल्क दो-दो लाख रुपये निर्धारित है।
बैठक में बताया गया कि अधिनियमों के प्रावधानों के अनुसार एआरटी एवं सरोगेसी केंद्रों के पंजीकरण से पूर्व आवेदित परिसर का निरीक्षण किया जाना अनिवार्य है। निरीक्षण में व्यावहारिक कठिनाइयों के दृष्टिगत भारत सरकार से प्राप्त मार्गदर्शन के क्रम में राज्य सहायता प्राप्त जननीय प्रौद्योगिकी एवं सरोगेसी बोर्ड की ओर से निरीक्षण संबंधी शक्तियों का प्रत्यायोजन जनपद स्तर पर गठित जनपदीय समुचित प्राधिकरण को किया गया है। यह प्राधिकरण एआरटी एवं सरोगेसी केंद्रों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण के लिए प्राप्त आवेदनों के सापेक्ष निर्धारित चेकलिस्ट के आधार पर आवेदित परिसरों का स्थलीय निरीक्षण कर अपनी संस्तुति नियमानुसार प्रेषित करेगा।
जनपदीय समुचित प्राधिकरण में जिलाधिकारी अध्यक्ष, अपर जिलाधिकारी (नगर) सदस्य, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी सदस्य-सचिव, नामित स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ/बाल रोग विशेषज्ञ/रेडियोलॉजिस्ट डॉ. यशवंत राव तथा संयुक्त निदेशक अभियोजन श्री कुँवर विक्रम सिंह सदस्य हैं। जनपद में एआरटी एवं सरोगेसी केंद्रों के पंजीकरण, नवीनीकरण तथा अन्य प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यवाहियों में समुचित प्राधिकारी के अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि जनपद में अब तक 19 आवेदकों द्वारा 25 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन सभी आवेदनों पर अधिनियमों के प्रावधानों के अनुसार नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी श्री अभिनव जे. जैन सहित जिला बोर्ड के अन्य सदस्य एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
*क्या हैं एआरटी केंद्र
एआरटी (सहायता प्राप्त जननीय प्रौद्योगिकी) केंद्र वे संस्थान हैं, जहां बांझपन के उपचार के लिए आधुनिक प्रजनन तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इन केंद्रों में सामान्यतः आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन), आईसीएसआई, आईयूआई, अंडाणु एवं शुक्राणु का संग्रह, प्रसंस्करण एवं संरक्षण, भ्रूण का निर्माण एवं संरक्षण, डोनर गैमीट से संबंधित सेवाएं तथा अन्य सहायक प्रजनन तकनीकों के माध्यम से उपचार उपलब्ध कराया जाता है।
*अधिनियम के प्रमुख प्रावधान
बैठक में अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि बिना पंजीकरण कोई भी एआरटी अथवा सरोगेसी केंद्र संचालित नहीं किया जा सकता। किसी भी रूप में व्यावसायिक सरोगेसी का संचालन, उसका प्रचार-प्रसार अथवा उससे लाभ अर्जित करना प्रतिबंधित है। केवल निर्धारित अर्हता वाले विशेषज्ञ एवं चिकित्सक ही सरोगेसी संबंधी सेवाएं प्रदान कर सकेंगे तथा पंजीकृत परिसर के अतिरिक्त किसी अन्य स्थान पर सरोगेसी संबंधी प्रक्रिया संचालित नहीं की जा सकेगी। सरोगेट माता बनने के लिए महिलाओं को प्रेरित करने वाले विज्ञापनों तथा व्यावसायिक सरोगेसी के किसी भी प्रकार के प्रचार-प्रसार पर रोक है। सरोगेसी की अवधि के दौरान सरोगेट माता का गर्भपात उसकी लिखित सहमति एवं सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना नहीं कराया जा सकता। अधिनियम के तहत सरोगेसी के उद्देश्य से मानव भ्रूण अथवा युग्मक का भंडारण तथा किसी भी प्रकार का लिंग चयन भी प्रतिबंधित है।