जर्जर सहकारी समिति भवन बना 'मौत का घर', टपकती छत से भीग रही खाद, हादसे के साये में किसान और कर्मचारी
-किसानों की मांग- नया भवन बने, सुरक्षित स्थान से हो खाद वितरण
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस राठ,हमीरपुर l तहसील स्थित रामलीला मैदान के पास सरकारी सहकारी क्रय-विक्रय समिति का भवन इन दिनों किसानों और कर्मचारियों के लिए खतरे का पर्याय बन गया है। वर्षों पुराना यह भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका है। बरसात के मौसम में छत से लगातार पानी टपक रहा है, जिससे गोदाम में रखा यूरिया और डीएपी खाद भीग रही है। वहीं जगह-जगह से प्लास्टर झड़ने और ईंटें गिरने के कारण यहां आने वाले किसानों और समिति कर्मचारियों की जान हर समय जोखिम में बनी हुई है। स्थानीय किसानों का कहना है कि समिति भवन की बदहाल स्थिति कोई नई बात नहीं है। कई वर्षों से भवन लगातार जर्जर होता जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और प्रशासन ने आज तक न तो इसके पुनर्निर्माण की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया और न ही समिति को किसी सुरक्षित भवन में स्थानांतरित किया। परिणामस्वरूप हर दिन सैकड़ों किसान अपनी जान जोखिम में डालकर खाद लेने के लिए इसी भवन में पहुंचने को मजबूर हैं। बरसात के दौरान हालात और गंभीर हो जाते हैं। छत से कई स्थानों पर पानी टपकने के कारण गोदाम में रखा रासायनिक खाद भीग जाता है। किसानों का आरोप है कि कई बार उन्हें मजबूरी में गीली खाद लेनी पड़ती है, क्योंकि खाद वितरण की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। उनका कहना है कि इससे खाद की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है, जिसका सीधा असर फसलों की पैदावार और किसानों की जेब पर पड़ सकता है। खाद वितरण के दौरान किसानों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है। धूप और बारिश से बचने के लिए वे इसी जर्जर भवन में बैठते हैं। भवन की छत से प्लास्टर उखड़ चुका है और कई जगहों से ईंटें गिर रही हैं। किसानों का दावा है कि पिछले तीन वर्षों में कई बार छत के टुकड़े नीचे गिर चुके हैं और कई लोग बाल-बाल बचे हैं। इसके बावजूद भवन की मरम्मत तक नहीं कराई गई।
समिति में तैनात कर्मचारी भी पूरे दिन इसी खस्ताहाल भवन के नीचे बैठकर कार्य करने को मजबूर हैं। कर्मचारियों का कहना है कि हर बारिश के दौरान डर बना रहता है कि कहीं छत का कोई हिस्सा भरभराकर न गिर पड़े। यदि ऐसा हुआ तो बड़ा हादसा हो सकता है। किसानों का आरोप है कि भवन की जर्जर स्थिति से संबंधित अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि ऐसा लगता है मानो प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो भविष्य में होने वाली किसी भी दुर्घटना की जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी। किसानों की प्रमुख मांगें है कि सहकारी क्रय-विक्रय समिति के लिए नया भवन तत्काल स्वीकृत कराया जाए। नया भवन बनने तक समिति का संचालन किसी सुरक्षित भवन में किया जाए। जर्जर भवन में खाद का भंडारण तत्काल बंद कराया जाए। किसानों के बैठने और खाद वितरण की सुरक्षित एवं व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। भवन की तकनीकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि किसी संभावित हादसे को रोका जा सके। रामप्रकाश, प्रेम, जयप्रकाश, प्रेमवती, रामसखी, मलखान, रवींद्र, जयसिंह, नारायण, लेखराज आदि आधा दर्जन से अधिक किसानों का कहना है कि खेती-किसानी से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण संस्था यदि स्वयं बदहाली का शिकार रहेगी तो इसका खामियाजा सीधे किसानों को भुगतना पड़ेगा। उनका कहना है कि प्रशासन को किसी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय तत्काल प्रभाव से ठोस कदम उठाने चाहिए।