मित्रता दिवस पर सरस काव्य गोष्ठी संपन्न
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सुमेरपुर, हमीरपुर। आज रविवार को राष्ट्रीय मित्रता दिवस पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में कवि हरीराम गुप्त निरपेक्ष जी के आवास पर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी के विशिष्ट अतिथि चंद्रशेखर अग्निहोत्री ने कहा कि आज के युग में कृष्ण सुदामा जैसी मित्रता दुर्लभ है। सच्चा मित्र वही है जो संकट में साथ दे। गोष्ठी के मुख्य अतिथि पूर्व बीएसए कामता प्रसाद विश्वकर्मा ने कहा "ये कुर्सियाँ सुनती नहीं, लाख चिल्लाये गरीबी सुर्खियां बनती नहीं।", गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे गजेन्द्र नारायण दीक्षित मोक्ष ने पढ़ा "कठिन बहुत है मित्रता, कर पाना विश्वास। तनिक चूक से टूटता, रिश्ता खासम खास।।", गोष्ठी के संयोजक हरीराम गुप्त निरपेक्ष ने पढ़ा "जन गण में सर्वत्र है, व्यवहारिक सम्बन्ध। यदा कदा देखा कहीं, मौलिकता अनुबंध।।', कुशल संचालन कर रहे कैलाश प्रसाद सोनी मृदुल ने पढ़ा "मानव के मौलिक मूल्यों में मैत्री महिमा मानी है, युग युग के जीवन दर्शन से कवि की गरिमा बानी है।", वीरेन्द्र पाल शजर ने पढ़ा"गहरी है बहुत नदिया, लहरों में रवानी है। उस पार भी जाना है, कश्ती भी पुरानी है।", गणेश सिंह विद्यार्थी जी ने पढ़ा "जो मुश्किलों में भी मीत बने रहते हैं, जो पंख बिना आकाश चुमाए रहते हैं। वही व्यक्ति तो खरा मित्र है,उसका ही अभिनंदन है। जो मित्रता को संस्कार बनाए रखते हैं।।", हरी प्रकाश कुशवाहा कौशल ने पढ़ा "वफ़ा खुलूस से सबको गले लगाते हुए। कटी है उम्र मेरी रस्म ये निभाते हुए।।", हरी किशन सेन ने पढ़ा "हम सच को ही समझ न पाए। फंसे रहे केवल माया में।", कमल किशोर कमल ने पढ़ा "सिर्फ़ बोलने से नहीं पूरे हों अरमान, छूना है आकाश को करो कर्म संधान।".