खुदीराम बोस सही मायने में एक युवा शहीद थे,डॉ.भवानी दीन
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सुमेरपुर,हमीरपुर l देशभक्तों की देश के प्रति भूमिका के मद्देनजर वर्णिता संस्था द्वारा दिनांक 11अगस्त को विमर्श विविधा के अन्तर्गत जिनका देश ऋणी के तहत मातृवेदी में युवा आत्माहुति के प्रतीक खुदीराम बोस की पुण्यतिथि पर संस्था के अध्यक्ष डा भवानीदीन ने श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि खुदीराम बोस सही मायने में एक युवा शहीद थे,देश के प्रति इनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है, इनका जन्म बंगाल के मिदनापुर जिले के बहुवैनी गांव में त्रैलोक्य नाथ बोस तथा लक्ष्मीप्रिया के घर 03 दिसम्बर 1889 को हुआ था, कक्षा नौ तक पढ़ने के पढ़ाई छोड़कर ये स्वदेशी आंदोलन में कूद पड़े,ये देश की दासता से दुखी थे,आंग्ल साम्राज्य कि अन्त चाहते थे,उस समय बंगाल के जज जार्ज किंग्सफोर्ड बहुत क्रूर थे, क्रांतिकारियों को सीधे फांसी पर चढ़ाते थे,यह खुदीराम को नागवार लगा, उसे मारने का प्लान अपने मित्र प्रफुल्ल कुमार चाकी के साथ मिलकर बनाया,जिस बग्घी पर फोर्ड निकलते थे,वेउस दिन बग्घी पर नहीं निकले, बल्कि दो महिलाएं निकलीं,बोस रात्रि होने के कारण समझ नहीं पाये,बम फेंक दिया, दोनों महिलाएं मारी गयी,यह जानकर बोस बहुत दुखी हुए, पकड़े जाने पर इन्हें मुजफ्फरपुर की सेन्ट्रल जेल में 11 अगस्त 1908 को लगभग 19 वर्ष की आयु में फांसी पर लटका दिया गया, कार्यक्रम में अशोक अवस्थी, सिद्धा, बाबूलाल प्रजापति, महावीर प्रजापति इलेक्ट्रीशियन, रामनारायन सोनकर, रामबाबू, होरी लाल, राहुल,शुभम सोनकर,पंकज सिंह, भोलू सिंह, रिचा, सतेन्द्र और अखिलेश आदि मौजूद रहे।