कवियों ने अपनी रचनाओं से विश्व कवि तुलसी को याद किया
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस सुमेरपुर, हमीरपुर। गोस्वामी तुलसीदास जयन्ती अ0 भा0 सा0 परिषद न्यास इकाई जिला हमीरपुर के तत्वावधान में, दिनाँक 19अगस्त 2026 को रात्रि 8 बजे से संयोजक हरी राम गुप्त 'निरपेक्ष' जी के आवास परनामी भवन सुमेरपुर (हमीरपुर) में कवि गोष्ठी आयोजित करके मनाई गयी। माँ सरस्वती और गोस्वामी तुलसीदास जी के चित्र का पूजन, अर्चन, वंदन के उपरांत संयोजक कवि हरी राम गुप्त 'निरपेक्ष'ने "प्रभु राम की महिमा और मैं" शीर्षक पर कवित्त छन्द के माध्यम से कहा -
अतुल तरंग ताल, आप व्यंजना की माल,
लघु अभिव्यंजना हूँ, हास परिहास हूँ।
प्रेम जीव सार तत्व, प्रेम रस अमरत्व,
प्रेम के प्रतीक आप, मैं तो प्रेमदास हूँ।। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कवि गजेंद्र नारायण दीक्षित 'मोक्ष 'जी ने पढ़ा -
गोस्वामी जी आपको, सादर करूँ प्रणाम।
राम चरित लिख आपने, हृदय रामायो राम।।
उपाध्यक्ष/कवि गजलकार नीतिराज सिंह यादव जी ने शेर पढ़ते हुए कहा -
नाजुक हालात पर ताल्लुक तोड़ दूँ कैसे।
हर बात को उसूलों से जोड़ दूँ कैसे।।
गीतकार उमेश कुमार सोनी ने अपने सश्वर गायन में कहा - राम की बात कह पाना मूर्खों के न बस में है।
राम को जान जाना भी भोगियों के न बस में है।।
मंत्री संचालक कैलाश प्रसाद सोनी जी ने माता हुलसी और पत्नी रत्नावली को श्रेय देते हुए कहा -
हुलसी तुलसी मणि जन्यो, रत्नावलि कियो दान।
तेहि मणि से निर्मित भयो, मानस का उद्यान।।
रत्ना का सुकुमार पुजारी, इस युग का वरदान बन गया।
रामचरित को ऐसे गाया, हर रसना में राम रम गया।।
गजलकार वीरेंद्र कुमार पाल 'शजर' ने गज़ल पढ़ते हुए शेर पढ़ा - गहरी है बहुत नदिया, लहरों में रवानी है।
उस पार भी जाना है, कश्ती भी पुरानी है।।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कवि डॉ गणेश सिंह 'विद्यार्थी जी' ने कार्यक्रम के समापन की घोषणा करने से पहले कविता पाठ करते हुए कहा -
"मैंने ज़ख्मों में सबके मरहम भरना सीखा है।
प्रीति प्यार की सरगम गाकर, पीड़ा हरना सीखा है।।