जाजमऊ CETP में विद्यार्थियों ने समझी दूषित जल के वैज्ञानिक शोधन की प्रक्रिया |
- गंगा की स्वच्छता को अपने जीवन का महत्व पूर्ण संकल्प बनाने की ली शपथ |
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। नमामि गंगे गंगा टास्क फोर्स द्वारा आयोजित चार दिवसीय पर्यावरण जागरूकता कार्यशाला में अनंतराम जयपुरिया विद्यालय के कक्षा 7 के विद्यार्थियों को जीव विज्ञान एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों को जाजमऊ स्थित 20 एमएलडी कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) का भ्रमण कराकर चमड़ा उद्योगों से निकलने वाले रासायनिक युक्त दूषित जल के वैज्ञानिक शोधन की प्रक्रिया समझाई गई। गंगा टास्क फोर्स के जवानों ने विद्यार्थियों को बताया कि जाजमऊ के चमड़ा उद्योगों से निकलने वाले दूषित जल को सीधे गंगा में जाने से रोकने के लिए उसे CETP तक पहुंचाया जाता है। यहां विभिन्न वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से पानी का उपचार, परीक्षण एवं गुणवत्ता की जांच की जाती है। निर्धारित मानकों के अनुरूप शोधन के बाद उपचारित जल का औद्योगिक उपयोग किया जाता है, जिससे पानी की बर्बादी को रोकने के साथ-साथ गंगा में प्रदूषित जल के प्रवाह पर भी प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जा रहा है। कार्यशाला में विद्यार्थियों को समझाया गया कि 20 एमएलडी क्षमता वाले CETP में आने वाले औद्योगिक अपशिष्ट जल का वैज्ञानिक उपचार केवल गंगा स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, जल संसाधनों के संरक्षण और सतत औद्योगिक विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
नमामि गंगे परियोजना एवं 137 CETF BN (TA) 39 GR गंगा टास्क फोर्स द्वारा विद्यार्थियों को पर्यावरण, प्रकृति, जल संरक्षण और गंगा स्वच्छता को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। कार्यशाला में जवानों ने विद्यार्थियों को बताया कि आज के विद्यार्थी ही कल देश और समाज का नेतृत्व करेंगे। इसलिए प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना बचपन से विकसित होना आवश्यक है। कार्यशाला के दौरान अनंतराम जयपुरिया विद्यालय के नन्हे विद्यार्थियों ने प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण और मां गंगा की स्वच्छता को अपने जीवन का महत्वपूर्ण संकल्प बनाने की शपथ ली। विद्यार्थियों ने कहा कि गंगा टास्क फोर्स द्वारा दी गई सीख को अपने दैनिक जीवन में अपनाते हुए स्वयं भी स्वच्छता के प्रति जागरूक रहेंगे और अपने परिवार एवं समाज को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करेंगे।कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम की शिक्षा देना नहीं, बल्कि उन्हें प्रकृति और जल संरक्षण की जिम्मेदारी समझाकर भविष्य का पर्यावरण-सचेत नागरिक बनाना रहा।