जनपद स्तरीय मिलेट्स महोत्सव का हुआ आयोजन
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन योजनान्तर्गत जनपद स्तरीय मिलेट्स महोत्सव एवं उप्र मिलेट्स पुनरोद्धार मिलेट्स रेसिपी कार्यक्रम का आयोजन कैलाश भवन, सभागार चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सांसद रमेश अवस्थी रहे। मेले में कृषि बीज,कृषि रक्षा, मृदा परीक्षण, उद्यान, एफ०पी०ओ०, जैविक खेती आदि पब्लिक व प्राइवेट सेक्टर के स्टाल लगाये गये। गोष्ठीं में जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से आये कृषकों ने तकनीकी जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम के दौरान सांसद रमेश अवस्थी ने संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की प्राथमिकता है कि किसानों, युवाओं, मातृ शक्ति एवं गरीबों की प्रगति हो। इसके लिये उनके प्रयासों का परिणाम है कि श्रीअन्न मिलेट्स को वैश्विक स्तर पर पहचान मिली जिस कारण हमनें 90 हजार टन का निर्यात किया गया है। भविष्य में श्रीअन्न मिलेट्स की माँग बढ़ेगी इसलिये किसानों को इस उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे किसानों को अपनी फसल का अच्छा मूल्य प्राप्त हो सके। शहरी क्षेत्र की तुलना में ग्रामीण क्षेत्र में बीमॉरिया कम होती है जिसका प्रमुख कारण मिलेट्स का प्रयोग है। उन्होनें किसानों से अधिक से अधिक मिलेट्स फसलों का उत्पादन पर जोर देते हुये कहा कि भारत की समृद्धि में अपना सहयोग दे ताकि 20417 तक भारत विकसित राष्ट्र बन सके।उन्होनें मिलेट्स की फसलों की महत्ता और पोषण के सम्बन्ध में बताते हुये कहा कि हेल्थ सोल्ड कम फार्म नॉट फ्रॉम फार्मेसी, मिलेट्स की फसलों से हम पोषणयुक्त भोजन प्राप्त कर सकते है जिससे बीमारियों न हो। इसके लिये किसानों को पोषण से भरपूर फसलों यथा ज्वार, बाजरा, रागी आदि का उत्पादन करना चाहिये। इसी क्रम में मुख्य विकास अधिकारी ने बताया कि जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि जनपद के किसान जो फसल उगा रहे है उसका उत्पादन अधिक हो तथा किसानों को अधिक मूल्य प्राप्त हो सके। उन्होनें मिलेट्स फसलों के तीन स्तर के बारे अवगत कराते हुये कहा कि इसका पहला स्तर है किसान जो कम लागत लगाकर अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकता है तथा मिलेट्स उत्पाद की मॉग अधिक होने के कारण अधिक लाभ प्राप्त कर सकता है। दूसरा स्तर है पोषण, मिलेट्स फसलों में अत्याधिक पोषण होता है जिससे मानव स्वास्थ्य ठीक रहता है तथा कम से कम बीमारियों होती है एवं तीसरा स्तर है व्यापार, मिलेट्स फसलों के प्रसंस्करण एवं उचित मार्केटिंग से अधिक से अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है। किसानों को मिलेट्स फसलों के सम्बन्ध में जो भी सहायता प्राप्त करनी हो, उसकी हरसम्भव मदद की जायेगी। धर्मेन्द्र कुमार, संयुक्त कृषि निदेशक, कानपुर मण्डल, कानपुर ने कृषकों को सम्बोधित करते हुये कहा कि भविष्य में खेती उन्नत कृषि यंत्रों के माध्यम से की जायेगी। उन्होंने कहा कि किसान भाइयों को प्रयास करना चाहिये जैविक रसायनों का प्रयोग करें ताकि आम जनमानस को गुणवत्तायुक्त एवं पोषणयुक्त भोजन प्राप्त हो सके। मेला में डा० आर०एस० वर्मा, उप कृषि निदेशक ने विभिन्न क्षेत्रों से आये कृषकों को सम्बोधित करते हुये कृषि विभाग द्वारा चलायी जा रही योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। गोष्ठी में चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर के वैज्ञानिक डा० अखिलेश मिश्रा, डा० रामजी गुप्ता, डा० सीमा सोनकर, डा० वी०के० त्रिपाठी, डा० साधना बैश एवं डा० विनोद प्रकाश ,डा० आर०एस० वर्मा, उप कृषि निदेशक तथा कृषि एवं कृषि से सम्बन्धित विभागों के अधिकारीगण उपस्थित रहें।
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