बैंक ने लोन स्वीकृत कर किया ठगी का खेल
- लोन 2015 जनवरी में सीसी और 21 लाख का होम लोन स्वीकृत कर किया फॉड
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। बैंक कर्मचारियों को मिलीभगत है ओरिएंटल बैंक की शाखा शारदा नगर मैं सीसी लोन के साथ होम रौन सवीकृत कर दिया। बैंक ने 2015 में लोन स्वीकृत के बाद पैसे के चक्कर लगाती रही पीड़िता, पर लोन के रकम अलग-अलग खातों में बैंक ने ही पंहुचा दी। पीड़िता की पुलिस दरखास्त पर फेंक कर्मचारियों ने पीड़िता से समझौता कर आश्वासन दिया कि लोन की रकम खाते में डाल दी जायेगी। बैंक द्वारा उत्पीड़ित कल्याणपुर निवासी अंजलि गौतम (पीड़िता) ने प्रेसवार्ता में बताया कि मेरा लोन 2015 जनवरी में 30 लाख का सीसी (Cash Credit) खाता नं० 09144015002626 व 21 लाख का होम लोन जिसका एकाण्उट नं. 09146015002608 स्वीकृत किया। सिक्योरिटी हेतु बैंक ने सीसी खाते की पाँच चेकें (854801, 854802, 854803, 854804 व 854805) से 30 लाख रुपये अपने चहेतों के खातों में भेज दिया। उसी दिन तथा खाता संख्या 09142191017229 की दो चेक संख्या 018911 व 018912 से उसी दिन 07 लाख रुपये निकाल लियें।पीड़िता ने अपने साथ हुये फ्राड की जानकारी हुयी तो बैंक के उच्चाधिकारियों को शिकायत की। बैंक के कर्मचारियों अपने आप को फसता देख कर मेरे खाते को 3,85,000/ की ओवर लिमिट कर दी जबकि इसके लिए कोई भी प्रार्थना पत्र नही दिया था और न ही स्टाम्प ड्युटी दी। उसी 2016 जनवरी दिन मेरे खाते से लूज चेक इशू कर 3,85,000 निकाल लियें जबकि चेक के लिए कोई भी आवेदन नही था। पीड़िता ने इस फ्राड की शिकायत पुलिस में की तो पुलिस ने जॉच कर मुकदमा संख्या दर्ज कर लिया। पुलिस ने बैंक के कर्मचारियों व सीए को थाने लायी व गिरफ्तार किया। तब बैंक कर्मचारियों ने मेरे खाते में 12 लाख रुपये 2016 दिसंबर को मेरे खाते में 12 लाख रुपये वापस किया। उसी दिन मेरे लूज चेक में जबरदस्ती हस्ताक्षर करा लिया था। बैंक कर्मचारियों ने जबरदस्ती समझौता करा लिया और खाता का रिनुअल करने का आश्वासन दिया और 2018 तक ब्याज पर ब्याज भराते रहें तब तक मेरे खाता कोई भी एनपीए नही हुआ। जब खाता आपरेट नही करने दिया तब खाता मेरा एनपीए हो गया। बैंक कर्मचारी हमारे घर आकर डराते धमकाते है जो पीछे हो गया उसे भूल जाओं अब पूरा पैसा जमा करों नही तो मैं तुम्हारा मकान और एजेन्सी सब नीलाम कर दूँगा और बैंक हमको अपमानित करने के लिए अखबार में निकालती है जिससे की प्रार्थिनी मानसिक, आर्थिक, सामाजिक अपमानित हो रही है। प्रकारणों को पीएमओ कार्यालय, वित्त मंत्री कार्यालय, गृह मंत्री कार्यालय, एससी-एसटी आयोग, बैंक के उच्चाधिकारियों को निरंन्तर प्रार्थना पत्र देती है कि मेरे खाते की जाँच करा कर न्याय दिलायें और उन कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही की जाए लेकिन अभी तक कोई भी कार्यवाही नही की गयी है केवल झूठा आश्वासन दिया गया है।