छात्र मुहम्मद मुदस्सिर बिन मेहताब को हुसैन की महान दीऩी उपलब्धि
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर।कुरान-ए-करीम को अपने सीने में सुरक्षित करना अल्लाह तआला की महान नेमत और सर्वोच्च सौभाग्य है, जो बहुत कम खुशनसीब लोगों को नसीब होता है। इसी सौभाग्य से एम एच एम पब्लिक स्कूल, आवास विकास हंसपुरम, नौबस्ता, कानपुर के कक्षा 7 के छात्र मुहम्मद मुदस्सिर बिन मेहताब हुसैन सम्मानित हुए हैं। उन्होंने मदरसा जामिया अरबिया आशिक़ुल उलूम, जूही लाल कॉलोनी, कानपुर में मात्र एक वर्ष की अल्प अवधि में पूरे कुरान-ए-करीम को हिफ़्ज़ कर एक ऐतिहासिक दीऩी उपलब्धि हासिल की है।मुहम्मद मुदस्सिर बिन मेहताब हुसैन ने यह पवित्र और बरकत वाला सफ़र उस्ताद-ए-मुहतरम कारी मुहम्मद अहमद साहब की निगरानी, कड़ी मेहनत और निष्ठापूर्ण मार्गदर्शन में पूरा किया। हिफ़्ज़ के दौरान उन्होंने असाधारण लगन, समय की पाबंदी, धैर्य, निरंतर अभ्यास और अनुशासन का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया। रोज़ाना सबक़, दौर और मंज़िल की नियमित मश्क़ से उनकी स्मरण शक्ति मज़बूत हुई और अल्लाह तआला के फ़ज़्ल व करम से कम समय में हिफ़्ज़ की तकमील संभव हो सकी।इस अवसर पर मदरसा के मोहतमिम मौलाना कलीम अहमद जामई साहब ने मुहम्मद मुदस्सिर की इस शानदार सफलता पर हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि यह उपलब्धि छात्र की व्यक्तिगत मेहनत, उस्तादों की ईमानदार कोशिशों और माता-पिता की दीऩी तरबियत का सुंदर संगम है। उन्होंने कहा कि मदरसा जामिया अरबिया आशिक़ुल उलूम का उद्देश्य ही ऐसे अमल करने वाले, कुरान से जुड़े और दीन-समझ रखने वाले विद्यार्थी तैयार करना है, जो क़ौम व मिल्लत के लिए गर्व का कारण बनें।उधर एमएचएम पब्लिक स्कूल के प्रबंधक अशफ़ाक सिद्दीकी ने भी इस अवसर पर हाफ़िज़ बने छात्र मुहम्मद मुदस्सिर बिन मेहताब हुसैन तथा उनके उस्ताद कारी मुहम्मद अहमद साहब को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विद्यालय के लिए भी गर्व का विषय है। मुहम्मद मुदस्सिर की इस ऐतिहासिक सफलता पर उनके माता-पिता, परिवारजन, शिक्षक, सहपाठी और क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर दौड़ गई। सभी ने अल्लाह तआला का शुक्र अदा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। अंत में दुआ की गई कि अल्लाह तआला मुहम्मद मुदस्सिर बिन मेहताब हुसैन के हिफ़्ज़ को शरफ़-ए-क़बूलियत अता फरमाए, उन्हें कुरान-ए-करीम का सच्चा आमिल बनाए, इल्म व अमल में तरक़्क़ी दे और उन्हें दीन-ए-इस्लाम व मिल्लत-ए-इस्लामिया की सेवा के लिए स्वीकार फरमाए। आमीन।
|