विचार/ कवि गोष्ठी में कवियों ने उकेरी प्रतिभाएं |
-जनता पर पड़ने लगी मॅहगाई की मार | गैस सिलेंडर हो गया,देखो नौ सौ पार - दिनेश दुबे |
जिला संवाददाता सुनील कुमार धुरिया
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस हमीरपुर। कलार्पण (भारत ) जिला इकाई हमीरपुर उ0प्र0 के तत्वावधान में विचार /कवि गोष्ठी का आयोजन हमीरपुर स्थित बलदाऊ मन्दिर में अपरान्ह 2 बजे से आयोजित की गयी। माँ सरस्वती जी का पूजन अर्चन और वंदन के उपरांत कवि/शायर वीरेंद्र पाल 'शजर' ने गज़ल -
जलते हुए दिये को, बुझाया न कीजिये।
हँसता अगर हो कोई, रुलाया न कीजिये।।
से कवि गोष्ठी को गति प्रदान किया। फिर वरिष्ठ कवि गणेश सिंह 'विद्यार्थी ने पढ़ा -
तूफानों से घिर कर भी, दीप जलाया है।
घातें प्रतिघातें सह कर भी, प्रीति निभाया है।।
कवि अवधेश कुमार साहू 'बेचैन' ने अपनी सम सामयिकी कविता पढ़ी -
एक बात पूछता हूँ बताओ न मोदी जी।
क्या नींद तुमको आती नहीं?
कलार्पण हमीरपुर जिलाध्यक्ष शिवकरण सिंह 'सरस' ने संगीत साहित्य कला के सन्दर्भ में अपने विचार व्यक्त करने के उपरांत कविता पढ़ी -
साहित्य कि पतवार कलाएं नौका विहार,
उत्ताल तरंगों मध्य स्वयं इठलाती हैं।
अभिव्यक्ति साहित्य संस्था के अध्यक्ष कवि प्रेमपाल द्विवेदी ने अभियान गीत पढ़ा -
हिन्दू आज बचाना है।
एक अभियान चलाना है।।
घर घर जा कर घर की कुण्डी,
अपने हाथ बजाना है।।
कलार्पण क्षेत्रीय साहित्य प्रमुख रेवती कुमार पाठक 'शेखर' ने कला के विभिन्न आयामों पर चर्चा की। फिर कविता पाठ को ओज की अभिव्यक्ति दी -
राणा का भाला अति विशाल,
जाकी अनी में बसत काल।
भाला का वार न सकत टाल,
पैठत कराल तो कटत भाल।।
कलार्पण के क्षेत्रीय संगठन मंत्री आचार्य देवनारायण सोनी ने अपने वैचारिक सम्बोधन के बाद पढ़ा -
मेरे जख्मों को नासूर बनाकर,पूछ रहे हो, कैसे हो?
मेरी राहों में काँटे फैलाकर, पूछ रहे हो, कैसे हो ?
हास्य कवि दिनेश दुबे ने अपनी हास्य रचनाओं से प्रसन्नता बिखेरते हुए कहा -
जनता पर पड़ने लगी, मँहगायी की मार।
गैस सिलेंडर हो गया, देखो नौ सौ पार।।
संचालक और मंत्री कवि कैलाश प्रसाद सोनी जी ने पढ़ा - कविता कवि की करुण कसक है
पीड़ा है अंतर्मन की।
विकल वेदना है जीवन के,
आह भरे विह्वल तन की।।
अध्यात्म के कवि देवीदीन '' ने पढ़ा -
मिट्टी ही दुनिया की तो चन्दन से ज्यादा रही।
मिट्टी ही दुनिया की तो बंधन में बांधे ही रही।।
अभिव्यक्ति संस्था के मंत्री डॉ ज्ञानेंद्र द्विवेदी की नदियों का संवर्धन करती कविता -
दूर देश से आती नदियाँ,
काम भी सबके आती नदियाँ।
निर्मल विमल और शीतल उज्ज्वल भी,
वह नीर बहाती नदियाँ।।
राकेश कुमार तिवारी ने पढ़ा -
जब जब मन मेरा अधीर होता है।
तब तब मेरा एक गीत होता है।।
कलार्पण हमीरपुर जिला उपाध्यक्ष नीतिराज ने मयंतगंद सवैया छन्द के माध्यम से कहा -
नींद लिया फिर चैन नसान न,
आय लिया सुधि मारग भूलो।
हाय! हिया नहिं माने जिया,
दिन रैन पुकार रहो सब भूलो।।
आज की विचार /कवि गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे कवि हरीराम गुप्त ने दोहा कुण्डलिया सवैया कवित्त गीत गज़ल और सुगम संगीत की कविताओं पर संक्षिप्त वक्तव्य से जानकारी दी और कविता पढ़ी -
अन्तस भाव तरंगों को मुखरित करती रहती कविता।
अलंकार रस छन्द ताल लय से बंधती रहती कविता।
दास नहीं हैं किसी नशा की मौलिकता सविता कविता।
मन्द प्रवाही महा नदी सी अविरल बहती रहती कविता।
पढ़कर कार्यक्रम का समापन किया।