विवि में पर्यावरण, समानता और सतत विकास आधारित शिक्षा पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
- विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने के लिए शिक्षकों को ऐसी शिक्षण परिस्थितियाँ निर्मित करनी चाहिए जो उन्हें ज्ञान निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित करें: प्रो. अमिताभ
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विवि (सीएसजेएमयू) के शिक्षा विभाग द्वारा शुक्रवार को लर्निंग फॉर टुमारो: इंटीग्रेटिंग एनवायरमेंट, इक्विटी एंड सस्टेनेबिलिटी थ्रू एजुकेशन विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन का आयोजन विवि के सेनानायक तात्या टोपे सीनेट हॉल में हुआ । इस आयोजन में सतत विकास, समता, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा सुधार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 जैसे समकालीन विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार विमर्श किए ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. अमिताभ मिश्रा (इंदिरा गांधी ओपेन यूनिवर्सिटी) ने कहा कि विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने के लिए शिक्षकों को ऐसी शिक्षण परिस्थितियाँ निर्मित करनी चाहिए जो उन्हें ज्ञान निर्माण की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित करें। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था को तकनीकी परिवर्तनों के अनुरूप ढालना अत्यंत आवश्यक है। विवि के प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए योग्य शिक्षकों की भूमिका, सामाजिक न्याय, भारतीय संस्कृति में निहित मानवीय मूल्यों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 की रचनात्मक समीक्षा की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि प्रो.प्रवीण तिवारी (दिल्ली विश्वविद्यालय) ने कहा कि पर्यावरणीय संकट, नदियों की बिगड़ती स्थिति तथा सामूहिक जिम्मेदारी पर बल देते हुए जयशंकर प्रसाद के उपन्यास “तितली” का उल्लेख किया। उन्होंने भू-राजनीति में अमेरिका की भूमिका, संयुक्त राष्ट्र प्रणाली, कार्बन उत्सर्जन के संदर्भ में प्रमुख देशों की जिम्मेदारी तथा पृथ्वी सम्मेलन–1992 सहित विभिन्न पर्यावरणीय संधियों और सम्मेलनों पर चर्चा की। कार्यक्रम में प्रो. कौशल किशोर (विभागाध्यक्ष शिक्षा विभाग,जामिया मिलिया,इस्लामिया विश्वविद्यालय) ने मन के उपनिवेश-मुक्तिकरण तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 में व्यापक सुधारों पर कहा कि शिक्षा केवल सूचना प्रदान करने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों में रचनात्मकता और आलोचनात्मक चिंतन विकसित करना भी इसका उद्देश्य होना चाहिए। यह आयोजन निर्देशक डॉ.तनुजा भट्ट एवं सहायक निर्देशक, डॉ.गोपाल सिंह के निर्देशन में संपन्न हुआ । इस आयोजन में डॉ.बद्री नारायण मिश्र, डॉ.प्रियंका मौर्या, डॉ.विमल सिंह, डॉ.कल्पना अग्निहोत्री, अनुपमा यादव, डॉ.स्नेह पांडेय, प्रिया तिवारी, डॉ.कुंवर कुलदीप सिंह चौहान समेत काफी संख्या में शोधार्थी विद्यार्थी मौजूद रहे ।
-150 से अधिक छात्र- छात्राओं ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के 150 से अधिक छात्र-छात्राओं ने शोध पत्र प्रस्तुत किए । जिसमें शिक्षा सुधार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, भारतीय ज्ञान परंपरा तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 सहित कई तमाम विषय मुख्य रूप से शामिल रहे।