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एआई मंथन 2.0 में भौतिक एआई, स्मार्ट शिक्षा और एआई कंप्यूटिंग पर हुआ मंथन
Updated: 9/14/2026 12:58:00 AM By Reporter- rajesh kashyap kanpur

एआई मंथन 2.0 में भौतिक एआई, स्मार्ट शिक्षा और एआई कंप्यूटिंग पर हुआ मंथन
- रोबोटिक्स, उच्च शिक्षा और शोध में एआई के व्यापक उपयोग की संभावनाओं पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार
हिंदुस्तान न्यूज़ एक्सप्रेस कानपुर। जनभवन और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय ‘एआई मंथन 2.0’ के दूसरे दिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बदलते स्वरूप, Physical AI, रोबोटिक्स, उच्च शिक्षा, शोध, कंप्यूटिंग क्षमता और रोजगार के भविष्य पर विशेषज्ञों ने विस्तार से विचार रखे। दूसरे दिन IIT मंडी के डॉ. अमित शुक्ल ने “From Research Papers to Robots in the Field: Building Judici’s Physical AI Ecosystem” विषय पर प्रस्तुतीकरण देते हुए कहा कि Artificial Intelligence अब केवल डिजिटल दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि तेजी से भौतिक दुनिया में प्रवेश कर रही है। उन्होंने Physical AI के विकास में तीन प्रमुख चुनौतियों—भौतिक दुनिया का मॉडल तैयार करना, रोबोट का मॉडल विकसित करना तथा रोबोट और उसके वातावरण के बीच interaction को समझना—पर प्रकाश डाला।  डॉ. शुक्ल ने भूमिगत पाइपलाइन और बिजली लाइनों की पहचान एवं निरीक्षण के लिए विकसित रोबोटिक प्रणालियों का उदाहरण देते हुए बताया कि ऐसी तकनीकें शहरों में बार-बार होने वाली खुदाई को कम करने तथा भूमिगत infrastructure की location और anomaly detection में उपयोगी हो सकती हैं। 
उन्होंने quadruped robots, drones, aerial manipulation, dual-arm robotic systems और long-distance teleoperation जैसी तकनीकों की संभावनाएं भी बताईं। डॉ. शुक्ल ने AI के सामाजिक प्रभावों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि Industrial Revolution ने जहां physical labour को प्रभावित किया, वहीं AI cognitive और knowledge-based work को बदल रही है। ऐसे में मानव की creativity, purpose, reasoning और meaningful work की भूमिका को नए सिरे से समझना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों और शोधार्थियों से एआई के केवल उपभोक्ता बनने के बजाय इसके विकास और नवाचार में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया।- उच्च शिक्षा को आधुनिक बनाने में एआई की भूमिकाकार्यक्रम में Google India के  श्री सौरभ राजपाल ने “Modernizing Higher Education for Impact, Scale, Employability” विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कहा कि एआई का उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उनकी क्षमता और कार्यक्षमता को बढ़ाना है। उन्होंने Gemini को शिक्षा के लिए एआई-संचालित सहायक के रूप में प्रस्तुत करते हुए बताया कि शिक्षक इसकी मदद से lesson plan, curriculum, quiz, assignment, assessment material और rubric तैयार कर सकते हैं। विद्यार्थी इसका उपयोग guided learning, परीक्षा की तैयारी, विषयों की गहन समझ और research ideas विकसित करने में कर सकते हैं। वहीं शिक्षा प्रशासकों के लिए लंबे दस्तावेजों का सार, ई-मेल ड्राफ्ट और प्रस्ताव तैयार करने जैसे कार्यों में एआई उपयोगी हो सकता है। उन्होंने Google Classroom और Google Workspace के साथ Gemini के उपयोग के उदाहरण देते हुए Gmail में ई-मेल का सार और उत्तर, Google Slides में प्रस्तुति, Google Forms में quiz तथा Google Drive में documents के सार जैसे कार्यों में एआई की उपयोगिता बताई। उन्होंने कहा कि एआई की सहायता से शिक्षण सामग्री को अधिक interactive, personalized और विद्यार्थी-केंद्रित बनाया जा सकता है।- एआई शोध के लिए कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ाना जरूरीदूसरे दिन NVIDIA India के डॉ. आयुष माहेश्वरी ने “Accelerating Research, Innovation and Talent at Scale” विषय पर प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने कहा कि एआई के तेजी से विस्तार के साथ intelligence एक प्रकार की commodity बनती जा रही है, लेकिन अत्याधुनिक AI की वास्तविक क्षमता का उपयोग करने के लिए computing power, energy, infrastructure, data और skilled human resources आवश्यक होंगे।डॉ. माहेश्वरी ने foundation models के विकास में pre-training, post-training और test-time scaling की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक AI models के लिए बड़े स्तर पर GPU और computing resources की आवश्यकता होती है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि AI की सफलता केवल computing power पर निर्भर नहीं है, बल्कि domain expertise भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।  उन्होंने विश्वविद्यालयों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों को केवल AI applications के उपयोग तक सीमित नहीं रहना चाहिए। विद्यार्थियों और शिक्षकों को model training, fine-tuning, computing और AI infrastructure की बुनियादी समझ भी विकसित करनी होगी।एआई मंथन 2.0 का दूसरा दिन इस दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा कि इसमें Artificial Intelligence के वर्तमान उपयोग से आगे बढ़कर Physical AI, Robotics, AI-enabled Education, Research Computing और मानव-तकनीक के बदलते संबंधों पर व्यापक चर्चा हुई। विशेषज्ञों के विचारों ने उच्च शिक्षा संस्थानों को एआई युग की नई आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण, शोध, नवाचार और प्रतिभा विकास की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।

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